अंदर और बाहर से एक समान होता है संतों का जीवन : टेक चंद
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। संत निरंकारी सत्संग भवन में रविवार को जोनल इंचार्ज टेकचंद की अध्यक्षता में सत्संग का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत पावन अवतारवाणी के गायन से हुई। मंच संचालन महात्मा नरेश निरंकारी ने किया। सत्संग में अनेक वक्ताओं ने अपने विचारों, गीतों और कविताओं के माध्यम से मिशन का संदेश दिया।
महात्मा टेकचंद ने कहा कि हम जैसी संगत करते हैं वैसी ही रंगत हममें आ जाती है, जैसे हम कोयले का काम करते हैं तो हमारे हाथ काले जरूर होंगे और यदि चूने का काम करते हैं तो हाथ सफेद हो जाते हैं। इसी प्रकार जब हम संतों-महापुरुषों का संग करते हैं तो हममें सहनशीलता, प्रेम, नम्रता आदि गुण अपने आप आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि हम जो भी कार्य करें पूरे मन से करें। सतगुरु ने हमें सेवा, स्मरण और सत्संग से जोड़ा है। कहा कि संत जो भी बोलते हैं, उसके हिसाब से कार्य भी करते हैं। उनकी कथनी और करनी में फर्क नहीं होता। वो सारे संसार को एक ही निगाह से देखते हैं। उन्होंने कहा कि 18 नवंबर से 20 नवंबर तक दिल्ली के बुराड़ी रोड पर सतगुरु माता सविंद्र हरदेव के निर्देशन में 70वां वार्षिक संत समागम आयोजित किया जाएगा। उधर, गांव शहजादपुर स्थित ब्रांच बुड़िया के संत निरंकारी भवन स्थल पर महात्मा रामनाथ की अध्यक्षता में सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग के दौरान उन्होंने कहा कि जिस भी संत का अपने सतगुरु पर पूर्ण विश्वास होता है, उसका हर काम पूरा होता है। उसे जीवन का हर सुख मिलता है। मुखी महात्मा अश्वनी कुमार, संचालक सोमप्रकाश, शिक्षक धर्मपाल, बालकिशन, तेजपाल, फकीर चंद आदि ने महात्मा रामनाथ व उनकथे साथ आए अजमेर सिंह का स्वागत किया।