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डॉक्टर बोले; ऐसे सरकार चली तो खांसी-जुकाम के लिए भी जाना पड़ेगा कारपोरेट अस्पताल

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डॉक्टर बोले; ऐसे सरकार चली तो खांसी-जुकाम के लिए भी जाना पड़ेगा कारपोरेट अस्पताल
सरकार की नीतियों के विरोध में आईएमए ने डीसी को सौंपा पीएम मोदी व सीएम खट्टर के नाम ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। एक ओर सरकार डाक्टर की शार्टेज का राग अलाप रही है वहीं, कह रही है कि एमबीबीएस क्वालीफाई डॉक्टर को एक टेस्ट देना होगा। उसके बाद ही वह ज्वाइनिंग कर पाएगा। इस कानून से तो डॉक्टर सेवा में आएगा ही नहीं। ऐसे में फैमिली फिजिशियन खत्म हो जाएंगे और खांसी जुकाम के लिए भी कारपोरेट अस्पताल जाना पड़ेगा। यह प्रतिक्रिया जिले के डॉक्टरों ने जिमखाना क्लब में आईएमए की प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान दी। इसके बाद आईएमए की ओर से डीसी रोहतास सिंह खरब को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को अपनी मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपा गया।
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जिमखाना क्लब में प्रेसवार्ता में आईएमए के जिला प्रधान डॉ. धीरेंद्र कुमार सोनी ने पीएनडीटी के मुद्दे पर कहा कि छोटी छोटी कागजी कार्रवाई की कमी के चलते डॉक्टर को जेल भेज दिया जाता है। इस एक्ट के तहत तीन साल की सजा का प्रावधान है। मेडिकल लापरवाही में सुप्रीम कोर्ट ने डाक्टर पर 11 करोड़ रुपये का जुर्माना किया। इस पर विचार करने की जरूरत है। क्लीनिकल एक्ट के तहत 10 बेड वाले अस्पताल को 20 से अधिक सरकारी एजेंसी से अनुमति लेनी होगी, जो अपने आप में बहुत मुश्किल काम है। इस व्यवस्था पर भी पुर्नविचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार डॉक्टर के खिलाफ होने वाले जुर्म को लेकर केंद्रीय कानून बनाए। मौजूदा राज्य सरकार ने कानून बना रखा है, लेकिन उसका लाभ डाक्टर को नहीं मिल रहा है। यदि कोई पुलिस केस बन जाए तो सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ता है। इस मौके पर डॉ. नरेंद्र कश्यप, डॉ. आर. मसीह, डॉ. राकेश गोयल, डॉ. विनीत, डॉ. राजन शर्मा, डॉ. ईश चड्डा, डॉ. राजकुमार गर्ग, डॉ. विजय गुप्ता, डॉक्टर हर्ष शर्मा, डॉ. विशाल कालड़ा, डॉ. विक्रम भारती, डॉ. योगेश जिंदल, डॉ. रीतू मग्गो, डॉ. दीपिका अग्रवाल, डॉ. प्रदीप कोहली, डॉ. नीलेश कोहली, डॉ. जेके गुलाटी, व अन्य मौजूद रहे।
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