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बेजुबानों की मदद को आगे आईं बेटियां, लावारिस कुतों को दे रहीं ‘जीवन दान’

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बेजुबानों की मदद को आगे आईं बेटियां, लावारिस कुत्तों को दे रहीं ‘जीवन दान’
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राहुल शर्मा
यमुनानगर। इंसान का सबसे वफादार दोस्त माना जाने वाला कुत्ते का सड़क पर लाचार देखा जाना आम है, मगर अब शहर की बेटियां इनकी मदद को आगे आईं हैं। शहर की कुछ लड़कियाें ने लावारिस कुत्तों को बचाने की पहल की है, जो अपनी पॉकेटमनी से गलियों और सड़कों पर मिलने वाले जख्मी-बीमार कुत्तों का इलाज कराती हैं। इसके लिए इन्होंने डॉग रेस्क्यू ऑर्गनाइजेशन (डीआरओ) बनाया है, जिसके के जरिए अब तक 350 कुत्तों का इलाज करा चुकी हैं। इनमें से सैकड़ों मरणासन्न कुत्तों को जीवनदान मिला है।
डीआरओ की प्रेसिडेंट मोनिका गुलाटी ने बताया कि जब वह छोटी थीं तो एक कहानी सुनी, जिसमें इंसान का सबसे वफादार दोस्त कुत्ते को बताया गया। लेकिन वह देखती थीं कि गलियों और सड़कों पर गुजर-बसर कर रहे इंसान के वफादार दोस्त की किसी को परवाह नहीं है। वह कभी भूख-प्यास और कभी बीमारी या हादसे में मर जाते हैं। इसलिए उन्होंने लावारिस कुत्तों को बचाने की ठानी। उन्होंने अपनी सहेलियों के साथ मिलकर सबसे पहले गलियों और सड़कों पर जख्मी, बीमार कुत्तों का इलाज खुद कर सकें, इसके लिए बेसिक ट्रेनिंग ली। इसके बाद में दिसंबर-2015 में डॉग रेस्क्यू ऑर्गनाइजेशन बनाया और इनका इलाज शुरू कर दिया। स्थानीय चिकित्सकों से भी मदद लेते हैं7
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सीरियस केस में पंचकूला-चंडीगढ़ से कराते हैं इलाज
मोनिका गुलाटी ने बताया कि डीआरओ बनाने के बाद हर दिन यमुनानगर-जगाधरी समेत आसपास के इलाकों में कहीं भी किसी कुत्ते के बीमार और जख्मी होने का पता लगने पर मौके पर जाकर टीम ने उसका इलाज कराया। इनमें सामान्य स्थिति में कुत्तों का इलाज स्थानीय चिकित्सकों से कराया गया, जबकि सीरियस केस में उन्हें चंडीगढ़ और पंचकूला ले जाया गया। उनके काम को देखते हुए अप्रैल-2016 में डीआरओ का एनजीओ के रूप में रजिस्ट्रेशन हो गया। अब तक डीआरओ ने 350 कुत्तों का इलाज कराया, जिससे से सैकड़ों कुत्ते बच पाए। साथ ही आवारा कुत्तों के लिए फीडिंग कैंप और उनके काटने से इंसान को बचाने के लिए रैबीज कैंप भी लगाए। अब तक उनकी टीम में 15 लोग जुड़ चुके हैं, जिनमें अधिकांश लड़कियां ही हैं और जॉब-स्टडी कर रहीं हैं। बावजूद इसके वह सभी मिलकर अपनी पॉकेटमनी से यह कार्य कर रहीं हैं।
हर घर पर 10 से 15 कुत्ते
डीआरओ की प्रेसिडेंट मोनिका गुलाटी, जरनल सेक्रेट्री निलम खतरी, कैशियर पूजा गुलाटी, ज्वाइंट सेक्रेट्री इंद्रा भाटी ने बताया कि संस्था के हर सदस्य के घर पर 10 से 15 कुत्ते हैं। इनमें कुछ सदस्यों के घर पर उपचाराधीन कुत्ते हैं तो कइयों ने कुत्तों को अडॉप्ट कर लिया है। जिनकी परिवार के सदस्य की तरह देखरेख करते हैं। कुत्तों के ठीक होने पर उन्हें खुले में छोड़ने पर भी उनकी स्थिति का समय-समय पर पता किया जाता है। अभी संस्था के पास कोई शेल्टर नहीं है, इसलिए उपचाराधीन कुत्तों का इलाज करने और उनको ठीक करने तक रखने में दिक्कत आती है। हालांकि, जल्द ही सरकार से जल्द शेल्टर मिलने की उम्मीद है।
45 फीट गहर बोरवेल से कुत्ते को निकालने पर मिला सम्मान: बीती 12 जुलाई को जगाधरी के गुलाबनगर के समीप 45 फीट खुले बोरवेल में एक कुत्ता गिर गया था। जिसे बचाने के लिए डीआरओ ने फायर ब्रिगेड की मदद से करीब तीन घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इसमें मौके पर सीढ़ी मंगाकर रस्सी के सहारे कुत्ते को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके लिए फायर ब्रिगेड विभाग की ओर से डीआरओ के सदस्यों को सम्मानित किया गया। डीआरओ के प्रयास से मौके पर खुला बोरवेल भी बंद कराया गया।
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बीमार होने पर कुत्तों को छोड़े नहीं, इलाज कराएं
मोनिका गुलाटी ने कहा कि अधिकांश मामलों में लोग कुत्तों को पालने के बाद उनके बीमार या जख्मी होने पर छोड़ देते हैं। ऐसे पालतू कुत्तों में बाहर गलियों और सड़कों पर रहने की आदत नहीं बन पाती और वह बीमार होकर मर जाते हैं। लोगों को चाहिए कि ऐसा न कर और बीमार व जख्मी कुत्ते का इलाज कराएं। डीआरओ की ओर से भी स्ट्रेय डॉग्स अडॉप्ट कराए जाते हैं। अडॉप्शन, किसी जख्मी व बीमार कुत्ते की मदद और संस्था से जुडने के लिए डीआरओ के हेल्पलाइन नंबर 8059290489 पर संपर्क किया जा सकता है।
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