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मूसलाधार बारिश से हर तरफ पानी ही पानी

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मूसलाधार बारिश से उफने नाले-नदियां, खेतों में घुसा पानी, सड़कें-गलियां भी डूबीं
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले में शुक्रवार देर रात से शुरू हुई बारिश शनिवार सुबह तक जारी रही। इस दरम्यान मूसलाधार बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। सुबह आठ बजे तक जिले में औसतन 82 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इधर, पहाड़ों पर यमुना नदी के कैचमेंट एरिया में भी बारिश हुई, नतीजतन यमुना और अन्य नदियां उफनने लगीं। नाले भी ओवर फ्लो हो गए। इससे शहर से गांव तक लोगों को परेशानी हुई। गांवों में खेतों में पानी भर गया, सड़कें-गलियां डूब गईं। घरों में पानी पहुंच गया। नेशनल हाईवे तक के उपर से पानी बहा, इससे कहीं-कहीं हाईवे भी क्षतिग्रस्त हो गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले मेें सबसे अधिक 98 मिलीमीटर(मिमी) बारिश जगाधरी में हुई। इसके अलावा रादौर में 97 एमएम, साढौरा में 92, छछरौली में 80, बिलासपुर में 75 व सरस्वती नगर में 50 एमएम बारिश हुई।
दो घंटे तक रहा एक लाख 47 हजार क्यूसेक जलस्तर, प्रशासन की बजी ‘घंटी’
सिंचाई विभाग के मुताबिक शनिवार देर रात से ही यमुना का जलस्तर बढ़ने लगा। यमुना में 70 हजार क्यूसेक पानी होने पर इसे बाढ़ घोषित कर दिया जाता है। हथनीकुंड बैराज पर सुबह छह बजे जलस्तर 147212 क्यूसेक रिकार्ड किया गया, जो अगले दो घंटे तक इसी स्तर पर रहा। यमुना में बाढ़ आते ही बैराज से पश्चिमी और पूर्वी यमुना नहर में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई। उधर, जिला प्रशासन भी अलर्ट हो गया। सुबह नौ बजे जलस्तर 133126 क्यूसेक पर पहुंच गया। इसके बाद घंटा दर घंटा जलस्तर घटता चला गया। शाम पांच बजे यमुना का जलस्तर घटकर 40643 क्यूसेक रह गया।
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खिजराबाद में नाला ओवरफ्लो, हाईवे पानी में डूबा, गड्ढा हुआ
खिजराबाद। क्षेत्र में हुई बरसात से जहां यमुना नदी बाढ़ के निशान तक पहुंची। वहीं स्थानीय नाले भी उफान पर आ गए, लगभग बीस घंटे लगातार हुई बारिश से खिजराबाद क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बनी रही। नेशनल हाईवे पर मंडी गेट के सामने व मेन बस स्टैंड पर भारी जलभराव रहा, जिससे आवाजाही में भी परेशानी हुई। नेशनल हाईवे पर बने नाले का पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर ही बहता रहा। खिजराबाद में नेशनल हाईवे पर लगभग दो फीट तक पानी जमा हो गया। जमा हुए पानी में हाईवे की सड़क क्षतिग्रस्त हो गई और राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हाईवे पर कलेसर रेस्ट हाउस के नजदीक सड़क के किनारे एक गहरा गड्ढा बन गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे के किनारे हुए गड्ढे के आस पास पत्थर रखे जिससे कि कोई हादसा ना हो सके।
नदी किनारे बसे गांवों के लोग सहमे, मुनादी कराई गई
रादौर। हथिनी कुंड बैराज में जलस्तर बाढ़ के निशान को क्रास करने से यमुना नदी किनारे बसे जठलाना क्षेत्र के लोगों की दिलों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। स्थिति पर नजर रखने के लिए शनिवार को तहसीलदार रादौर अशोक कुमार ने यमुना नदी के गुमथला, जठलाना, संधाला, लालछप्पर आदि घाटों का राजस्व विभाग की टीम के साथ दौरा किया। इस दौरान उनके साथ क्षेत्र के सरपंच व गणमान्य व्यक्ति भी यमुनानदी के घाटों पर पहुंचे। तहसीलदार रादौर अशोक कुमार ने बताया कि यमुना नदी में आए पानी से स्थिति अभी नियंत्रण में है। पानी नदी के अंदर बह रहा है। नदी किनारे बसे गांव के लोगों को मुनादी के द्वारा सूचित कर दिया गया है कि वह यमुना किनारे व यमुना पार अपने खेतों में न जाएं। रात के समय यमुना नदी पर पहरा देकर स्थिति पर नजर बनाए रखें। प्रशासन ग्रामीणों की मदद के लिए हर समय तैयार है। राजस्व विभाग की टीम हर समय प्रभावित गांवों में मौजूद रहेगी। इस अवसर पर गुमथला सरपंच कृष्ण मेहता, वरयामसिंह, डॉ सुदेश बंसल, डॉ शुभम सलूजा, अर्जुन पंडित आदि मौजूद थे।
पटरी न होने से खेतों में आया सोमनदी का पानी
बिलासपुर। दो दिन से पहाड़ों और स्थानीय क्षेत्र में हो रही बारिश की वजह से शनिवार को सोम नदी में उफान आ गया। जिसके कारण सोम नदी से लगते लगभग आधा दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हुए। गांव मलिकपुर बांगर के समीप सोम नदी के किनारे लगभग दो हजार फीट के क्षेत्र में पटरी ना होने के कारण सोम नदी का पानी आस पास के खेतों में घुस गया। इससे गांव के किसानों की दर्जनों एकड़ धान की फसल पानी में पूरी तरह से डूब गई। पानी की मात्रा इतनी अधिक थी कि गांव के बाहर बने श्मशान और सड़क के ऊपर से भी गुजरने लगा। इसके कारण बिलासपुर से लेदी, खिजराबाद, पौटासाहिब, व हिमाचल प्रदेश में जाने वाले राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। गांव मलिकपुर बांगर के सरपंच राज कुमार राणा व नंबरदार राहुल राणा ने बताया कि ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित करके बड़ी मशक्कत के साथ दो हजार फीट टूटी पटरी के निर्माण की मंजूरी ली थी, लेकिन गांव के कुछ ग्रामीणों के हस्तक्षेप के कारण आज तक पटरी का निर्माण नही हो पाया है। सोम नदी के टूटे तटबंध के कारण गांव के ग्रामीण रजनीश की लगभग छह एकड़ ,देवेंद्र राणा की आठ एकड़, राकेश की तीन एकड़, गुरनाम की नौ एकड़, राम कुमार की लगभग छह एकड़ धान की फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई है। शनिवार सुबह अचानक सोम नदी उफान पर पहुंच गई जिससे रणजीतपुर, बनकट, भमनौली, मुजाफ्त, खानू वाला, गाढ़ वाली, माजरा, चिंत पुर भमनौली सहित अनेक गांवों में पानी घुसने का भय बरकरार है। गांव भमनौली में भी इस वर्ष सोम नदी के किनारे बनी पटरी की मरम्मत ना होने के कारण ग्रामीणों को भय सता रहा है कि कहीं सोम नदी के उफान का पानी तटबंध तोड़ कर उनके खेतों की ओर रुख न कर जाए। गांव भमनौली के महिपाल , राम कुमार, विक्रम, जंगशेर सिंह ने बताया कि शनिवार की सुबह जब वे अपने खेतों में पहुंचे तो वहां तीन से चार फीट तक पानी भरा हुआ था। किसान सुल्तान सिंह, अमरीक सिंह का कहना है कि अगर तीन चार दिन तक पानी खेतों में इसी तरह से भरा रहा तो उनकी फसलें बर्बाद हो जाएगी। उधर, बिलासपुरर से जगाधरी जाने वाले मार्ग पर वीटा मिल्ट प्लांट के समीप लगभग चार से पांच फीट पानी भर जाने व छछरौली मोड़ पर तीन से चार फीट पानी भरने से आने जाने वाले लोगों को भारी परेशानी हुई।
फसलें डूबी, नुकसान की आशंका
छछरौली। दो दिनों से हो रही भारी बारिश की वजह से सोम नदी और पथराला नदी पूरे उफान पर हैं। इससे आस-पास के गांवों में भय का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र के दर्जनों गांवों की सैकड़ों एकड़ फसलें पानी में डूबी हुई हैं। लोगों का कहना है कि अब तक बारिश के सीजन का यह सबसे अधिक बारिश है। लोगों में इस बात का भी भय बना हुआ है कि बाढ़ बचाव कार्यों के तहत किए गए कार्य पानी में ना बह जाए। यदि ऐसा हुआ तो गांवों के भीतर पानी आ जाएगा।
मारवा खुर्द में बारिश से गिरा लियाकत का कच्चा मकान
यमुनानगर/ बिलासपुर। मारवा खुर्द के लियाकत अली का कच्चा मकान शुक्रवार देर रात्रि को हुई मुसलाधार बारिश में दीवार गिर गई। गनीमत रही कि परिवार के सदस्य मकान के बरामदे में सोए हुए थे। लियाकत के परिवार को आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने के लिए राशि मंजूर हुई थी, लेकिन केवल एक किश्त मिलने से वह दीवारें ही खड़ी पाया था। लियाकत ने बताया कि करीब चार महीने पहले उसे 25 हजार रुपये की पहली किश्त मिली थी। इस रकम से उसने अपने कच्चे मकान के नजदीक पक्का मकान बनाना शुरू किया था। लेकिन दूसरी किश्त न मिलने के कारण उसके मकान का लेंटर नहीं डल पाया। पक्का मकान न बन पाने के कारण लियाकत का परिवार कच्चे मकान में ही रह रहा था। मकान गिरने से उसका खाने-पीने का सामान व अन्य घरेलू सामान भी मलबे में दबकर खराब हो गया।
गरीब दलमीर की छत ढही
यमुनानगर/खिजराबाद। अराईयांवाला निवासी दलमीर सिंह का कच्चा मकान बारिश में ढह गया। गरीब की श्रेणी में आने के बावजूद उसका बीपीएल कार्ड पहले ही गांव की राजनीति की भेंट चढ़ चुका है। अब उसके सिर पर ना छत है और ना गरीब होने का प्रमाण। दलमीर को चिंता सता रही है कि वह अब अपना मकान कैसे बना पाएगा।
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दलमीर सिंह ने बताया कि वह अराईयांवाला का स्थायी निवासी है और मेहनत मजदूरी करके अपना व अपने परिवार का गुजर बसर करता है। मूसलाधार बारिश में उसके मकान की कच्ची छत गिर गई। उसका परिवार तिरपाल डालकर गुजर बसर कर रहा है। दलमीर ने बताया कि पहले उसका बीपीएल राशन कार्ड था। लेकिन गांव की राजनीति के चलते उसका बीपीएल कार्ड काट कर एपीएल कर दिया गया है। इसके बाद से उसे बीपीएल को मिली वाली सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है।
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