समस्या के मकड़जाल में फंसी है पब्लिक, कब मिलेगी आजादी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। हम साल दर साल आजादी का जश्न मना रहे हैं, मगर पब्लिक को रोजमर्रा की समस्याओं से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। जनप्रतिनिधि से लेकर अफसर तक सोए हुए हैं, वे पब्लिक को समस्याओं से आजादी दिलाने के लिए प्रयास करते नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में यह सवाल मौजू हो उठा है कि, शहर को अतिक्रमण और पार्किंग न होने समेत अन्य रोजमर्रा की समस्याओं से आजादी कौन दिलाएगा।
पार्किंग का नहीं इंतजाम, सड़कें ही बन गईं पार्किंग
शहर में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है। मुख्य मार्गों समेत बाजारों में हर जगह सड़कें ही पार्किंग बन कर रह गई हैं। दोपहिया और चारपहिया वाहन सड़कों पर बेतरतीब खड़े रहते हैं। इससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रहती है और सुबह-शाम जाम की स्थिति बनी रहती है। इसमें योजना में भी कमी सामने आ रही है। शहर की कुछ मुख्य सड़कों गोबिंदपुरा रोड के बाद भगत सिंह चौक से जगाधरी के अग्रसेन चौक तक सड़कें चौड़ी करने की कोशिश जा रही है, मगर वाहनों की पार्किंग के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी गई है। ऐसे में वाहन चालक सड़कों किनारे ही वाहन खड़ा कर रहे हैं। सबसे ज्यादा समस्या रेलवे रोड, जगाधरी वर्कशाप रोड के दोनों ओर रहती है। ठीक यही हाल जगाधरी के मुख्य मार्गों व बाजारों में हैं। कहते हैं कि, जिला प्रशासन ने इसके लिए कई बार योजना बनाई, लेकिन यह आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है।
अतिक्रमण से फुटपाथ हुए गायब
दुकानदारों ने अपने सामान सड़कों पर फैला रखे हैं, नतीजतन शहर की मुख्य सड़कों से फुटपाथ पूरी तरह गायब हो चुके हैं। फुटपाथ न होने से पैदल चलने ़वालों को मजबूरन सड़कों पर चलना पड़ता है, जिससे हर वक्त दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए नगर निगम ने कई बार खानापूर्ति की, मगर उसका कोई असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति मीराबाई बाजार, न्यू मार्केट, खेड़ा बाजार, रेलवे रोड में हैं।
पुराना रादौर रोड के रेलवे फाटक पर नहीं बना फ्लाईओवर, रोज लगता है जाम
पुराना रादौर रोड पर रेलवे फाटक पर लगने वाली जाम की समस्या का दशकों बाद भी निदान नहीं हो पाया है। इसके लिए रेलवे फाटक पर फ्लाईओवर बनाने की लंबे समय मांग की जा रही है। योजना पर काम भी हुआ, लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ पाई। सूरते हाल यह है कि रेलवे फाटक अधिकांश समय बंद रहता है, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। फाटक के खुलने पर भी वाहन चालकों में पहले निकलने जल्दबाजी में जाम की स्थिति बनी रहती है। वहीं, दो पहिया वाहन चालक बंद रेलवे फाटक के नीचे से वाहन निकालते रहते हैं और कई बार वह ट्रेन की चपेट में आकर अपनी जान से हाथ भी धो चुके हैं।
निकासी में रोड़ा बन रही डेयरियां नहीं हो पाईं शिफ्ट, बेकार पड़े करोड़ों के कॉम्पलेक्स
शहर की निकासी व्यवस्था में रोड़ा बनने वाली डेयरियां दशकों बाद भी शहर से बाहर शिफ्ट नहीं हो पाई हैं, जबकि डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट पिछले 12 सालों से अधर में लटका है। इसके लिए दड़बा, कैल, औरंगाबाद और रायपुर में जमीन अधिग्रहण कर करोड़ों रुपये की लागत से डेयरी कांप्लेक्स बनाए गए थे, जहां डेयरी संचालकों को प्लॉट आवंटित किए गए थे, लेकिन निकासी सहित अन्य सुविधाओं के अभाव में अब भी शहर से डेयरियों को कांप्लेक्स में शिफ्ट नहीं किया जा सका है। शहर से डेयरियां बाहर जाने से सीवरेज चोक होने की समस्या भी दूर होगी, क्योंकि डेयरियों से निकलने वाला गोबर नालियों से होता हुआ सीवरेज में जाकर उसे चोक कर देता है।