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150 साल पहले सरस्वती की धारा में प्रवाहित होकर आए थे शिवलिंग

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बिलासपुर। प्रसिद्ध काली माता मंदिर में स्थित शिव मंदिर लगभग 150 वर्ष से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में सावन माह, शिवरात्रि के साथ-साथ प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा होती है। मंदिर के महात्म्य के बारे में पुजारी का कहना है कि 150 वर्ष पूर्व सरस्वती की धारा के साथ प्रवाहित होकर आए शिवलिंग को मंदिर में पूरे विधि विधान के साथ स्थापित किया गया था।
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मंदिर में स्थित शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए कस्बा और जिले के विभिन्न कस्बों व गांवों के लोग पहुंचते हैं। मंदिर में सुबह और शाम को आरती होती है। 26 जुलाई को कांवड़ियों के द्वारा जलाभिषेक को लेकर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस मंदिर में लोगों की गहरी आस्था है। सावन माह में पूजा-अर्चना करने से पापों से मुक्ति मिलती है। मंदिर के इतिहास के बारे में सेवक रवि भूषण ने बताया कि लगभग 150 वर्ष पूर्व सरस्वती की धारा के साथ प्रवाहित होकर आए शिवलिंग को मंदिर में स्थापित किया गया था। इसके पश्चात पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी होने लगी। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। शिव मंदिर में जलाभिषेक करने से मनोकामना पूर्ण होती है। मान्यता है कि यहां मात्र ओम नम: शिवाय के जाप से जलाभिषेक करने से कष्ट दूर हो जाते हैं।
सावन के महीने में मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। रोशनी के व्यापक प्रबंध किए जाते हैं। सावन माह में श्रद्धालु सुबह तीन बजे से मंदिर में पहुंचना शुरू कर देते हैं। यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहता है। शिव भक्तों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
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