संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। पश्चिमी यमुना नहर में कटाव होने से खारवन गांव के किसानों की जमीन लगातार नहर में समाती जा रही है। किसानों के मुताबि भूमि कटाव होने से करीब 15 एकड़ जमीन पानी में समा गई है। इससे किसानों ने सिंचाई विभाग और ठेकेदार के खिलाफ रोष है।
किसान सतीश कांबोज, अनिल कुमार, राजकुमार, पृथ्वीराज, राजकरण, राम कुमार, रिंकू, जसविंद्र व उपजीत ने आरोप लगाते हुए बताया कि पश्चिमी यमुना नहर में हो रहे कटाव को लेकर अनेकों बार सिंचाई विभाग व अन्य अधिकारियों को मौखिक व लिखित रूप से प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। उसके बावजूद भी इसकी तरफ प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया है। गांव की इस मुख्य समस्या को कोई भी सुनने को तैयार नहीं है।
उल्लेखनीय है पश्चिमी यमुना नहर को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। एक हिस्सा तो पक्का कर दिया है दूसरी साइड कच्ची छोड़ दी गई है। इससे कच्चे किनारों पर कटाव शुरू हो गया है। किनारों पर सिंचाई विभाग ने कार्य किया है। किनारे खोदने के कारण भूमि का भारी कटाव होता जा रहा है। कटाव के कारण धान की लगी फसल भी बह गयी है।
सिंचाई विभाग द्वारा नई पक्की नहर बनाने के कारण कच्ची नहर की चौड़ाई कम हो गई है। इस पर पानी का बहाव किसानों की जमीन की तरफ बहुत बढ़ गया है। इससे पहले विभाग ने किसानों की जमीन से लगते नहर के किनारे पर कटाव को रोकने के लिए ईंट, रोड़ा व स्टड लगा रखे थे, अब वे सब खोदाई की भेंट चढ़ गए हैं। किसानों की मांग है कि उनके खेतों का कटाव रोका जाए और हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए।