‘बहुराष्ट्रीय कंपनियों के झांसे में न आएं, जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाएं’
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य ने मंगलवार को लोगों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के झांसे में न आने और किसानों से जैविक खेती अपनाने की अपील की। कहा कि, जैविक खेती के जरिये जीरो बजट में खेती की जा सकती है। इस दौरान उन्होंने लोगों को जैविक खाद बनाने का तरीका भी बताया। राज्यपाल डीएवी गर्ल्स कॉलेज के सभागार में छोटूराम विचार ट्रस्ट की ओर से प्राकृतिक खेती विषय पर आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। आचार्य ने कहा कि, देसी गाय के गोबर और मूत्र के जरिए 30 एकड़ में बिना किसी लागत के खेती की जा सकती है। इसका उदाहरण कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में देखा जा सकता है। वहीं खेती से जुड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि, हरित क्रांति के नाम पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने किसानों को लूटने का काम किया है। पैदावार बढ़ाने के नाम पर बीजों को नष्ट कर हाईब्रिड बीज तैयार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि खेतों में अत्यधिक खाद और कीटनाशक से जमीन बंजर बन रही है। आचार्य ने किसानों से आह्वान किया कि वह प्राकृतिक खेती की ओर रुख करें, जिसकी लागत जीरो है। जीरो बजट खेती में महीने में कम से कम एक बार प्रति एकड़ 10 किलोग्राम देसी गाय के गोबर और 7 लीटर गोमूत्र की जरूरत पड़ेगी। एक देसी गाय प्रतिदिन 11 किलोग्राम गोबर और 8 लीटर मूत्र देती है, जो कि एक एकड़ के लिए पर्याप्त है। कार्यक्रम में हरियाणा विधानसभा स्पीकर कंवरपाल गुर्जर ने विशिष्ट अतिथि और यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, डीसी रोहताश सिंह खरब ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम का आयोजन छोटूराम विचार ट्रस्ट के महासचिव डॉ. विजय दहिया के देखरेख में किया गया। मौके पर डीएवी गर्ल्स कॉलेज की कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ. विभा गुप्ता, समाज कल्याण बोर्ड चेयरमैन रोजी मलिक आनंद, मदन चौहान, मानसिंह आर्य, संगीता सिंघल, डॉ. विभा, राजेश सपरा, सतवंत सूदन, डॉ. शिव कुमार सैनी, डॉ. उदयभान, चिराग सहगल उपस्थित रहे।
ऐसे बनाएं जैविक खाद
राज्यपाल ने बताया कि 200 लीटर के ड्रम में पानी भरकर उसमें एक दिन के गाय के गोबर, मूत्र के साथ थोड़े से गुड़ और किसी भी दाल का बेसन डाल लें। फिर उसे करीब एक सप्ताह तक घड़ी की दिशा में सुबह-शाम तीन चार बार घुमाएं। इसके बाद एक एकड़ के लिए जैविक खाद तैयार हो जाएगी। इस खाद के जरिए खेत में भारी मात्रा में केचुएं पनप जाएंगे, जो पैदावार को बढ़ाने में सक्षम है। साथ ही उन्होंने पशुओं की नस्ल सुधारने पर भी जोर दिया।
अधिक खाद से नुकसान: स्पीकर
स्पीकर कंवरपाल ने कहा कि जिस प्रकार खिलाड़ी डोपिंग के जरिए स्वयं की परफॉर्मेंस बढ़ा लेते हैं, उसी प्रकार किसान भी खेतों में अधिक खाद का प्रयोग कर पैदावार बढ़ा रहे हैं, लेकिन बाद में इससे नुकसान होता है। यमुनागर विधायक घनश्यामदास अरोड़ा ने कहा कि देश में हर साल करीब एक लाख टन खाद और कीटनाशक दवाई का प्रयोग किया जा रहा है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है। साथ ही जमीन बंजर होने के कगार पर पहुंच रही है।
किसानों के मसीहा थे सर छोटूराम
छोटूराम विचार ट्रस्ट के महासचिव एवं सिविल अस्पताल यमुनानगर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय दहिया ने कहा कि सर छोटूराम किसानों के मसीहा थे। उन्होंने ता-उम्र किसानों की भलाई के लिए कार्य किए। कृषि प्रधान देश मेें आज भी किसानों की हालत दयनीय है। खेती बाड़ी घाटे का सौदा हो गई है। आज किसानों को जीरो बजट खेती की ओर अग्रसर होने की जरूरत है।