संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वितरित किए गए हजारों टैबलेट अब छात्रों की परेशानी का कारण बन गए हैं। जिले के राजकीय स्कूलों में दिए गए कुल 12,087 टैबलेट खराब हो चुके हैं या सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। इसके चलते विद्यार्थियों की डिजिटल पढ़ाई लगभग ठप पड़ गई है और शिक्षकों की चिंता भी बढ़ गई है।
सरकार की ओर से डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से टैबलेट वितरित किए गए थे, ताकि छात्रों को ई-कंटेंट और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री का लाभ मिल सके। लेकिन अब बड़ी संख्या में टैबलेट खराब होने के कारण यह योजना अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। स्कूलों से लगातार शिकायतें विभाग तक पहुंच रही हैं, मगर मरम्मत और रिप्लेसमेंट की प्रक्रिया बेहद धीमी बताई जा रही है।
शिक्षकों का कहना है कि जिन विषयों का डिजिटल कंटेंट टैबलेट में पहले से अपलोड किया गया था, वह अब सिर्फ रिकॉर्ड तक सीमित रह गया है। छात्रों को इन शैक्षणिक सामग्रियों का लाभ नहीं मिल पा रहा। कई स्कूलों में टैबलेट चार्ज नहीं हो रहे, कई की स्क्रीन खराब हो चुकी है, जबकि कुछ डिवाइस कुछ मिनट चलने के बाद बंद हो जाते हैं।
ऐसे में डिजिटल क्लास की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। इस समस्या का सबसे ज्यादा असर 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। इन कक्षाओं का सिलेबस पहले से ही भारी होता है और बोर्ड व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी साथ-साथ करनी होती है। डिजिटल सपोर्ट बंद होने से छात्रों की तैयारी प्रभावित हो रही है और शिक्षकों को भी पढ़ाई पूरी कराने में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उधर, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलता का कहना है कि टैबलेट खराब होने की जानकारी संज्ञान में है और इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। संबंधित कंपनियों और तकनीकी टीम के माध्यम से टैबलेट ठीक कराने या बदलने की प्रक्रिया मुख्यालय स्तर पर चल रही है।
विभाग का दावा है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई को किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि टैबलेट योजना की सोच सही थी, लेकिन रखरखाव और मॉनिटरिंग की कमी ने पूरी व्यवस्था को कमजोर कर दिया।
उनका कहना है कि केवल डिवाइस बांटने से डिजिटल शिक्षा सफल नहीं हो सकती। इसके लिए नियमित जांच, समय पर मरम्मत और तकनीकी सहायता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यदि जल्द ही टैबलेट ठीक नहीं हुए तो 11वीं और 12वीं के छात्रों को बड़ा शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि उनका भविष्य बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा होता है।