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पांच साल में साढ़े 11 हजार मिले टीबी के मरीज

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केंद्र सरकार 2025 तक देश को टीबी बीमारी से मुक्त बनाने का प्रयास कर रही है। वहीं जिले में टीबी के मरीज साल दर साल बढ़ते ही जा रहे हैं। केवल मरीज ही नहीं बढ़ रहे बल्कि इस घातक बीमारी से मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। पांच साल में टीबी से 751 लोगों की मौत हो चुकी है। टीबी से मरने वालों का आंकड़ा वाकई डराने वाला है। चूंकि हर साल टीबी के करीब सात प्रतिशत मरीजों की मौत टीबी से हो रही है।
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2017 से लेकर 2021 तक जिले में टीबी के 11495 मरीज मिल चुके हैं। 2017 में जहां 1610 मरीज मिले थे वहीं 2021 में 2705 मरीज मिल चुके हैं। हर साल टीबी के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों का उपचार न केवल सिविल अस्पताल में बल्कि निजी अस्पतालों में भी हो रहा है। सिविल अस्पताल में टीबी का उपचार पूरी तरह से मुफ्त है। टीबी के मरीज को उपचार के दौरान 500 रुपये प्रति माह दी जाती है। इतना ही नहीं जो व्यक्ति लोगों को टीबी की जांच कराने में सहयोग करता है या फिर अस्पताल को सूचना देता है उसे भी एक बार 500 रुपये विभाग की तरफ से दिए जा रहे हैं।
भारत को टीबी मुक्त करने की मुहिम के तहत प्रशासन ने जिले के सभी सरकारी विभागों में कर्मचारियों व अधिकारियों के स्वास्थ्य की जांच कराने का भी निर्णय लिया है। जिन कर्मचारियों में खांसी, थकान व बुखार जैसे लक्षण कई दिनों से दिख रहे हैं उनकी टीबी की भी जांच कराई जाएगी। ताकि कोई कर्मचारी टीबी से ग्रस्त मिलता है, तो उसका समय रहते उपचार किया जा सके। वहीं अब ग्रामीण स्तर पर भी शिविर लगाकर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने के साथ उनके स्वास्थ्य की जांच भी कराई जाएगी।
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टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) ऐसा संक्रामक रोग है, जिसके सबसे ज्यादा मरीज देखने को मिलते हैं। यह एक संक्रामक रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बड़ी आसानी से फैल जाता है। फेफड़ों का टीबी सबसे सामान्य टीबी है। यह हवा के जरिए भी एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल जाती है। यह माइकोबेक्टेरियम व ट्यूबरकुलोसिस नाम की बैक्टीरिया से होती है।
टीबी के मरीजों में खांसी के साथ मुंह से खून भी आता है। अगर किसी व्यक्ति को तीन हफ्ते से अधिक खांसी रहती है तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सीने में दर्द होना भी टीबी का एक सामान्य लक्षण हैं। टीबी के मरीजों में बुखार भी देखा गया है। अगर बुखार लंबे समय तक रहे तो टीबी की जांच करवा लेनी चाहिए। इसके अलावा थकान भी टीवी का लक्षण है।
कार्यवाहक सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी का कहना है कि टीबी एक जानलेवा बीमारी है। केंद्र सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। खांसी व अन्य लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। तुरंत अस्पताल में जाकर इसकी जांच कराएं। टीबी के मरीजों को खोजने के लिए विभाग द्वारा स्क्रीनिंग तेज की गई है।
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