दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना सहित देश की कई राज्य सरकारें मुस्लिम धर्मगुरुओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने रविवार को पहली बार हिंदू धर्म के पुजारियों-पुरोहितों के कल्याण के लिए एक बोर्ड गठित करने की बात कही है। इससे विभिन्न विपक्षी दलों को आगामी चुनावों में राजनीति का एक नया मुद्दा मिल गया है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने हरियाणा सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि देश की दूसरी सरकारों को भी इसी तरह का कदम उठाना चाहिए।
मनोहरलाल खट्टर ने रविवार को एक कार्यक्रम में शामिल होने के अवसर पर ब्राह्मणों के आराध्य भगवान परशुराम की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश करने की घोषणा की। इसके साथ ही भगवान परशुराम की एक विशालकाय मूर्ति स्थापित करने और इसके लिए भूमि आवंटित करने की बात भी कही। पुजारी-पुरोहित कल्याण बोर्ड का गठन करने की घोषणा करने के बाद उन्होंने कहा कि यह बोर्ड पंडितों-पुजारियों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता देने के मुद्दे पर भी विचार करेगा। हरियाणा में विधानसभा चुनाव में डेढ़ वर्ष से भी ज्यादा का समय है, लेकिन मुख्यमंत्री के इस बयान को अगले चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा सांसद ने बढ़ाई खट्टर की परेशानी
खट्टर ने यह घोषणा ऐसे समय में की है, जब प्रदेश में अगला मुख्यमंत्री ब्राह्मण समुदाय से बनाए जाने की मांग उठने लगी है। भाजपा के ही नेता रोहतक से सांसद अरविंद शर्मा ने रविवार को ही यह बयान देकर खट्टर के दिल की धड़कनें बढ़ा दी थीं कि प्रदेश में अगला मुख्यमंत्री ब्राह्मण समुदाय से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 12 से 15 फीसदी आबादी ब्राह्मणों की है, लेकिन उसकी हमेशा से उपेक्षा होती रही है। अब इस समुदाय को उसका अधिकार मिलना चाहिए। शर्मा के इस बयान के बाद प्रदेश भाजपा में ही दो अलग खेमे होने की बात खुलकर सामने आ गई है। अगले चुनाव में यह पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।
हालांकि, इस बयान के बाद अरविंद शर्मा मीडिया के सामने आए और उन्होंने खुलकर खट्टर का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके बयान का यह अर्थ नहीं है कि मनोहरलाल खट्टर अच्छे मुख्यमंत्री नहीं हैं। बल्कि वे अगले दस सालों तक मुख्यमंत्री बने रहने के योग्य हैं। लेकिन उन्होंने ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए यह बयान दिया था। शर्मा की इस सफाई के बाद भी प्रदेश में खट्टर सरकार के भविष्य को लेकर सियासत गरमा गई है। एमबीबीएस डॉक्टरों के लिए भी डिग्री के बाद सरकारी सेवा में बने रहने, या भारी जुर्माना भुगतने के आदेश के बाद खट्टर सरकार विपक्षियों के निशाने पर है।
सीएम चेहरा बदलने की बात क्यों
दरअसल, सोशल मीडिया में कई बार मनोहरलाल खट्टर को उनका टर्म पूरा होने से पहले ही बदलने की बात कही जाती रही है। उत्तराखंड से लेकर गुजरात तक चुनाव के पहले कई राज्यों में मुख्यमंत्री का चेहरा बदलकर भाजपा ने एंटी इनकमबेंसी फैक्टर को कमजोर करने में सफलता पाई है। चर्चाओं के बाद भी हिमाचल प्रदेश में यह कार्ड न आजमाने का पार्टी को नुकसान भी उठाना पड़ा है। इसे देखते हुए हरियाणा में भी समय रहते मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने की बात कही जाने लगी है। लेकिन स्वयं मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने इस तरह की चर्चाओं को सोशल मिडिया की बात कहकर खारिज कर दिया है।
विहिप ने कहा, दूसरी सरकारें भी करें ये काम
हरियाणा सरकार के इस निर्णय की जानकारी होते ही विहिप ने देश की दूसरी राज्य सरकारों के सामने अपनी मांग रख दी। संगठन के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने एक बयान जारी कर कहा कि देश की विभिन्न राज्य सरकारों में मुस्लिम धर्मगुरुओं को हर महीने ज्यादा पैसा देने की होड़ लगी हुई है। यह देश की जनता के टैक्स से मिले पैसे की बर्बादी है।
हालांकि, उन्होंने हिंदुओं के धर्मगुरुओं पुरोहितों-पंडितों को वेतन देने की बात का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस लोकतांत्रिक देश में हर धर्म, जाति-पंथ के लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए। यदि किसी एक धर्म के धर्मगुरु को वेतन दिया जाता है, तो दूसरे धर्मों के धर्मगुरुओं के बारे में भी विचार किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में हरियाणा सरकार ने एक सराहनीय प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि पंडितों-पुरोहितों को आर्थिक मदद से उनकी स्थिति में सुधार होगा और वे एक सम्मानपूर्ण जीवन जी सकेंगे। विहिप अपने स्तर पर पंडितों-पुरोहितों के कल्याण के लिए कई कार्यक्रम चलाता है।