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Tokyo Olympic 2021: आर्थिक तंगी के कारण छूट गया था अभ्यास पर राहुल ने नहीं छोड़ी उम्मीद, अब पूरा होगा सपना 

Fri, 23 Jul 2021 03:15 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा)

सार

राहुल ने 2014 में विजयवाड़ा में हुई जूनियर नेशनल प्रतियोगिता की 20 किलोमीटर प्रतिस्पर्धा में रजत पदक जीता। वर्ष 2019 में रांची में हुए सीनियर वाकिंग कप में रजत पदक हासिल किया और फरवरी 2021 में रांची में 20 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा में 1 घंटा 20 मिनट व 26 सेकेंड का समय लेकर रजत पदक जीता।
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राहुल रोहिल्ला। - फोटो : फाइल फोटो
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टोक्यो ओलंपिक में 20 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा में हिस्सा लेने वाले बहादुरगढ़ के राहुल रोहिल्ला के मुकाबले 5 अगस्त को होंगे। राहुल फिलहाल बंगलुरू कैंप में अभ्यास कर रहे हैं। राहुल और उनके प्रशंसकों को पूरा भरोसा है कि वे ओलंपिक में देश के लिए जरूर मेडल जीतकर लाएंगे।

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राहुल ने फरवरी 2021 में रांची में हुई प्रतियोगिता में 20 किलोमीटर की दूरी एक घंटे 20 मिनट 26 सेकेंड में पूरी करके पैदल चाल में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। वह अपने ताऊ के बेटे आशीष को अपनी प्रेरणा मानते हैं। आशीष ने ही तकनीकी व मानसिक तौर पर उनको मजबूत करते हुए तीन-तीन घंटे तक कड़ा अभ्यास कराया। परिणाम रहा कि रांची में उन्होंने न केवल रजत पदक जीता, बल्कि ओलंपिक के लिए भी अपना टिकट पक्का कराया।


करीब 25 वर्षीय राहुल ने 2013 में 17 साल की उम्र में अपने ताऊ के बेटे के साथ पैदल चाल का अभ्यास शुरू किया था। वह दिन-रात ओलंपिक में खेलने और देश के लिए पदक जीतने का सपना देखते थे। यह सपना उस समय अचानक टूटता दिखाई दिया जब वर्ष 2016 में उनके मां-बाप अचानक बीमार पड़ गए। पिता रोहतास रोहिल्ला पंखा रिपेयरिंग का काम करते हैं और मां गृहिणी हैं। घर के हालात अच्छे नहीं थे। हर माह उनके लिए करीब 10-12 हजार रुपये की दवाई आने लगी। ऐसी हालत में राहुल की डाइट और वाकिंग के लिए जूतों का खर्च मुश्किल हो गया। 
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राहुल ने बीच में ही खेल छोड़ दिया। राहुल ने बताया कि खेल छूटने के दुख में वे रात-रातभर सो नहीं पाते थे। हमेशा अपना टूटता हुआ सपना याद आ जाता था। कुछ माह ऐसे ही चलता रहा। मुझे परेशान देख मां ने कहा मैं ठीक हूं, तुम खेलने जाओ। पिता ने भी हौसला बढ़ाया। दिसंबर 2016 में खेलना फिर शुरू किया। फरवरी 2017 में खेल कोटे से जबलपुर में हुई आर्मी की भर्ती में सिपाही के पद पर भर्ती हो गया। इसके बाद उन्हें कोई समस्या नहीं आई। हरियाणा सरकार की ओर से पांच लाख रुपये मिलने के बाद डाइट व अभ्यास में होने वाले खर्च को लेकर राहुल व उनके परिवार की चिंता कम हो गई।

राहुल संयुक्त परिवार में रहते हैं। ताऊ का बेटा आशु पैदल चाल में जूनियर नेशनल खिलाड़ी रह चुका है। दूसरा भाई आशीष पैदल चाल में जूनियर नेशनल रिकॉर्डधारी है। मगर चोट लगने की वजह से वह आगे नहीं खेल सका। घर की हालत ठीक नहीं होने की वजह से राहुल ने कुश्ती व अन्य खेल नहीं चुना। ललित भनोट एथलेटिक्स अकादमी के कोच भीम अवार्डी खिलाड़ी रहे चरण सिंह राठी की देखरेख में तीनों भाइयों ने अभ्यास किया।

राहुल की पैदल चाल में बड़ी उपलब्धियां रही हैं। वर्ष 2014 में विजयवाड़ा में हुई जूनियर नेशनल प्रतियोगिता की 20 किलोमीटर प्रतिस्पर्धा में रजत पदक जीता। वर्ष 2019 में रांची में हुए सीनियर वाकिंग कप में रजत पदक हासिल किया और फरवरी 2021 में रांची में 20 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा में 1 घंटा 20 मिनट व 26 सेकेंड का समय लेकर रजत पदक जीता। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में वह बढ़-चढ़ कर भाग लेते रहे। दो बहनों के इकलौते भाई राहुल रोहिल्ला का कहना है कि उनका पूरा प्रयास ओलंपिक में पदक जीतकर अपना व अपने देश व क्षेत्र का नाम रोशन करना रहेगा।
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