शिक्षकों और संसाधनों की कमी और फीस में भारी इजाफे से खफा विद्यार्थी केयू प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे।
इनका आरोप था कि केयू प्रशासन की बेरुखी के कारण ही उन्हें संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ता है और कक्षाओं का बहिष्कार कर सड़कों पर आना पड़ता है। इनमें यूआईईटी, यूनिवर्सिटी कॉलेज और बीएचएम के विद्यार्थी शामिल थे।
वीरवार को इन संस्थानों के विद्यार्थियों ने वीसी आफिस के सामने धरना दिया। प्रदर्शनकारी विद्यार्थी यहां करीब चार घंटे तक डटे रहे और केयू प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने के दौरान एसएफआई और इनसो के छात्र नेताओं ने भी केयू प्रशासन की मनमानी पर रोष प्रकट करते हुए विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाया।
इस मौके पर फीस बढ़ोतरी, शिक्षकों की कमी, प्लेसमेंट नहीं मिलना और लैब में संसाधनों की कमी जैसे मुद्दे उठाए। एसएफआई की उपाध्यक्ष मनीता ने कहा कि केयू प्रशासन लगातार विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन कर रहा है। यही कारण है कि विद्यार्थियों को अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
आश्वासन के बावजूद नहीं घटी फीस
एसएफआई के सदस्य प्रकाश चंद ने बताया कि फीसों के बढ़ने के कारण पहले भी प्रदर्शन किया था तब कुल सचिव ने कहा था कि इस विषय पर विचार किया जाएगा और फीस कम करने का प्रयास किया जाएगा। बावजूद इसके आज तक इस विषय कोई ध्यान नहीं दिया। इसी कारण आज प्रदर्शन किया गया है। यदि इन मागों को नहीं माना गया तो आंदोलन और भी तेज होगा।
ये हैं प्रमुख मांगें
री अपीयर की फीस को कम करना।
यूआईइटी लैब में संसाधनों पूरे करने।
पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हों।
प्लेसमेंट सैल की समस्या दूर करना।
पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों का इंतजाम करना।
कम नहीं कर सकते फीस : कुलसचिव
केयू के कुलसचिव डॉ. कृष्ण चंद रल्हाण ने बताया कि पिछले चार साल से केयू में कोई फीस नहीं बढ़ाई। पेपर चेक करने वाले शिक्षकों पहले से ज्यादा पैसे दिए जा रहे हैं। इस कारण मामूली सी फीस बढ़ाई है। आसपास के यूनिवर्सिटी के समान ही फीस कर दी । फीस को कम नहीं किया जाएगा। कुल सचिव ने कहा कि बीएचएम की फीस बढ़ने के बारे में नहीं पता, जिस कारण विद्यार्थियों से फीस बढ़ने का लेटर मांगा है। लेकिन कोई भी विद्यार्थी लेटर नहीं लाया। बीएचएम की फीस को नहीं बढ़ाया गया।
सुविधाओं की जगह बढ़ा दी फीस
इनसो के सदस्य संदीप नैन ने बताया कि यूनिवर्सिटी कालेज में शिक्षकों के कमी है। यहां पर कक्षाएं नहीं लगती हैं और केयू प्रशासन अपनी फीसें मनमाने तरीके से बढ़ा रहा है। जो सरासर गलत है, केयू प्रशासन को बढ़ी हुई फीसों को वापस लेना चाहिए।
मनमाने तरीके से बढ़ रही फीस
छात्रा साक्षी ने बताया कि केयू प्रशासन मनमानी करते हुए फीसों को बढ़ा रहा है पहले री अपीयर की फीस 900 रुपये थी, फिर 1000 रुपये कर दी और अब 1250 रुपये कर दी, जो गलत है। यूआईईटी में शिक्षकों की कमी है, जिस कारण कक्षाएं भी नहीं लगती और यही वजह है कि विद्यार्थी परीक्षाओं में पिछड़ते हैं।
ऐसे में कैसे होगी पढ़ाई
छात्रा अनीता ने बताया कि केयू प्रशासन लगातार फीसों में इजाफा कर रहा है। वे बढ़ी हुई फीसें कहां से देंगे। जिस प्रकार फीसों में वृद्धि हो रही है उस प्रकार तो माता-पिता का वेतन नहीं बढ़ता। अनीता ने कहा कि केयू प्रशासन फीसों को कम करना तो दूर विद्यार्थियों की दिक्कतों को और बढ़ा रहा है।
परीक्षाएं सिर पर, लैब के दर्शन नहीं
यूनिवर्सिटी कॉलेज की छात्रा टिंकू ने बताया कि यूसीके में पढ़ाई के स्तर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक इस कॉलेज में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की एक बार भी लैब नहीं लगी ही नहीं, जबकि परीक्षाएं नजदीक आ गई हैं।
बेतहाशा बढ़ा दी फीस
राहुल शर्मा और विजय राणा बीएचएम के छात्र ने बताया कि री अपीयर की फीस पहले 500 रुपये थी जो इस बार बढ़ाकर 1100 रुपये कर दी। इससे केयू प्रशासन की मनमानी का पता लगता है। हमारी मांग है कि केयू प्रशासन फीस की जगह सुविधाओं की ओर ध्यान दें।