फोटो :41: गांव मनौली में स्वीट कॉर्न की फसल को पानी से निकालने किसान।
सोनीपत। यमुना का जलस्तर कम हो रहा है। जिससे यमुना क्षेत्र के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। शुक्रवार को यमुना का जलस्तर तीन फीट तक कम हो गया। शुक्रवार देर शाम तक यमुना का जलस्तर 215.5 मीटर तक आ गया था। हालांकि यमुना क्षेत्र में करीब 13445 एकड़ फसल में पानी भरा हुआ है, जिसमें गन्ने को छोड़कर अन्य फसल को भारी नुकसान हुआ है। खासकर मनौली के पास प्रगतिशील किसानों को काफी नुकसान हुआ है।
यमुना नदी में बाढ़ आने से उससे सटे 25 गांव प्रभावित हुए थे। इसमें सबसे बुरे हालात गांव जाजल टोंकी में हैं। इस गांव के चारों तरफ पानी भरा होने के कारण अभी भी इसका संपर्क टूटा हुआ है। गांव में दुकानों पर खाने पीने का सामान खत्म होने के कगार पर है। हालांकि शुक्रवार को राहत की बात यह रही कि लगातार दूसरे दिन जलस्तर में कमी आई है। यमुना क्षेत्र में फसलों को काफी नुकसान होने का अंदेशा है। खासकर जिस फसल में पानी भरा है उसके बर्बाद होने का डर है।
करणी सेना और विधायक के भाई ने पहुंचाई मदद
शुक्रवार को विधायक मोहन लाल बड़ौली के भाई माईराम कौशिक और करणी सेना के महामंत्री दीपक चौहान के नेतृत्व में खाद्य सामग्री गांव जाजल टोंकी पहुंचाई गई। बच्चों को बिस्कुट व ब्रेड समेत अन्य सामान वितरित किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जाजल टोंकी के ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। जिसके चलते उनकी मदद के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं मनौली टोंकी के ग्रामीण अभी भी गांव के मंदिर के पास टेंट में रहने के लिए मजबूर हैं।
मनौली क्षेत्र के प्रगतिशील किसान परेशान
मनौली क्षेत्र के खेतों में जलभराव होने से प्रगतिशील किसानों की मुसीबत बढ़ गई। उनकी स्वीट कॉर्न, खीरा, टमाटर व शिमला मिर्च की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई। जिससे उनका उत्पादन काफी कम होगा। पहले से तैयार फसल को लेकर भी वह मंडी में नहीं पहुंच रहे हैं। लगातार जलभराव के कारण फसलों में होने वाले नुकसान का जायजा पानी पूरी तरह से उतरने के बाद ही लगाया जा सकेगा। यह तय है कि सब्जियों की करीब 500 एकड़ फसल पूरी तरह से खराब हो चुकी है। किसानों ने सरकार से बर्बाद फसलों का मुआवजा मांगा है। साथ ही पूरे क्षेत्र में जलभराव के कारण पशु चारे की किल्लत पैदा हो गई है। पशुपालकों के लिए चारा जुटाना बड़ी चुनौती बनने वाला है।
फोटो :41: गांव मनौली में स्वीट कॉर्न की फसल को पानी से निकालने किसान।