यमुना में बह रहा करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी
सोनीपत/गन्नौर। यमुना में आई बाढ़ के बाद आसपास के खेतों में भरा पानी अभी उतरा भी नहीं था कि फिर से जलस्तर बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यमुना का जलस्तर एक बार फिर से खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है। यमुना में इस समय 215.2 मीटर यानी करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी बह रहा है। हालांकि सोनीपत में जलस्तर 217 मीटर से ऊपर जाने पर खतरे के निशान पर होता है। यमुना क्षेत्र में तेजी से भूमि कटाव हो रहा है। वहीं आसपास के ग्रामीणों की समस्या कम नहीं हो सकी है। भैरा बांकीपुर के श्मशान घाट में पानी भरने से लोगों को ड्रेन नंबर आठ की पटरी पर शव का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे आसपास के गांवों के लोगों की चिंता फिर से बढ़ गई है। अभी भी कई गांवों के खेतों में पानी भरा हुआ है। अगर जलस्तर बढ़ा तो फिर से बाढ़ आ सकती है। यमुना में बह रहे पानी के सोमवार को सवा दो लाख क्यूसेक तक पहुंचने की संभावना है।
यमुना में जलस्थर बढ़ने के साथ तेज बहाव से किसानों के खेतों का कटाव हो रहा है। बेगा घाट के टापू का भी काफी हिस्सा यमुना में बह चुका है। जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। किसान युनूस नंबरदार ने बताया कि यमुना के पानी के तेज बहाव में कई एकड़ जमीन यमुना में बह चुकी है और अभी भी भूमि कटाव जारी है। लगातार हुई बारिश और अब हथिनीकुंड से बार-बार छोड़े गए पानी से यह खतरा बढ़ता जा रहा है।
किसानों ने कोठर तोड़ने शुरू किए
यमुना की जमीन में तेजी से हो रहे कटाव के चलते किसान पूरी तरह से चिंतित हो गए हैं। यमुना में कटाव के साथ किसानों के कोठरे (कमरे) भी यमुना में न बह जाएं इसके लिए किसानों ने अपने कोठरे तुड़वाने शुरू कर दिए हैं, ताकि उन्हें नुकसान न उठाना पड़े।
ठोकरों की मरम्मत नहीं कराने का आरोप
यमुना में लगातार हो रहे कटाव के चलते किसान बेगा घाट पर एकत्रित हुए। किसानों ने आरोप लगाया कि सिंचाई व हरी विभाग ने ठोकरों की मरम्मत नहीं कराई थी। जिस कारण स्थिति काबू में नहीं आ रही है। यमुना ठोकरों के पत्थरों को अपने साथ बहा ले गई है। उनका आरोप है कि बेगा घाट पर जमीन के कटाव को रोकने के लिए करीब 8 ठोकरों का लंबे समय से मरम्मत नहीं हुई है। जिसका खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
श्मशान घाट में भरा पानी
यमुना में आई बाढ़ के बाद से भैरा बांकीपुर गांव के खेतों के साथ ही बाहर बने श्मशान घाट में भी पानी भरा है। गांव की सरपंच के पति जयराम शर्मा ने बताया कि श्मशान घाट के डूबने से ग्रामीण की मौत के बाद शव का अंतिम संस्कार करने के लिए ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई। ग्रामीणों ने मजबूरी में ड्रेन नंबर-8 की पटरी पर चिता तैयार कर शव का अंतिम संस्कार करना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से आग्रह करते हुए कहा कि गांव के जल्द से जल्द हालात सुधारने की मांग की है।
फोटो 53- यमुना में तेज बहाव के चलते बेगा के पास भूमि में होता कटाव। संवाद
फोटो 53- यमुना में तेज बहाव के चलते बेगा के पास भूमि में होता कटाव। संवाद
फोटो 53- यमुना में तेज बहाव के चलते बेगा के पास भूमि में होता कटाव। संवाद