सोनीपत। महिला की दोनों किडनी निकालने के विवाद को लेकर सोमवार को निजी अस्पताल के चिकित्सक ने अपना पक्ष रखा है। मामले को लेकर डॉ. गौरव रंधावा ने पत्रकारवार्ता में बताया कि महिला वीणा की किडनी अलग-अलग नहीं थी, बल्कि घोड़े की नाल की तरह एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी। परिजन जब इलाज के लिए उनके पास पहुंचे, उस समय एक साइड की किडनी काम करना लगभग छोड़ चुकी थी। इस संबंध में परिजनों को बता दिया गया था।
उन्होंने बताया कि 1 मई को महिला की जान बचाने के लिए ऑपरेशन के दौरान रक्त का रिसाव अचानक से तेज हो गया। अगर इस दौरान किडनी को नही निकाला जाता तो मरीज की जान को खतरा था। मरीज की जान बचाने के लिए उन्हें जो जरूरी समझा उसे किया। उसके पति ने अपनी किडनी तक नहीं दी। साथ ही परिजन महिला की ननद को किडनी डोनेट करने के लिए आगे लाए। परिवार से बाहर की किडनी डोनेट करने से पहले बोर्ड से मंजूरी की प्रक्रिया लंबी हो जाती है, लेकिन महिला के परिजन मंजूरी नहीं ले पाए। दिल्ली के अस्पताल से महिला को छुट्टी दे दी। चिकित्सक ने कहा कि अब वह इस पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत ही कदम उठाएंगे।