फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जहां सीखने की ललक नहीं, वहां तरक्की भी नहीं : जस्टिस संजय करोल

Sat, 16 Mar 2024 10:35 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
विज्ञापन
सोनीपत के राई स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विद्
विज्ञापन
सोनीपत। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस संजय करोल ने कहा कि न्याय और जजमेंट में भारी अंतर होता है। जो जजमेंट है, जरूरी नहीं कि वह न्याय हो। वह फाइलों से नहीं मानव जीवन के साथ डील करते हैं। न्याय वही है, जो सामाजिक हो। न्याय के लिए अधिवक्ताओं की भी उतनी ही अधिक जिम्मेदारी है, जितनी एक न्यायाधीश की होती है। उन्होंने न्याय को परिभाषित करते हुए छात्र-छात्राओं को सीखने की ललक को खत्म न होने देने की सीख दी। कहा कि जहां सीखने की ललक खत्म हो जाती है, वहां तरक्की रुक जाती है। जस्टिस करोल शनिवार को डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे।
विज्ञापन

प्रो बोनो क्लब की तरफ से निशुल्क कानूनी सेवाओं व क्षमता निर्माण विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जस्टिस संजय करोल के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन ने भी शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में एनएलयू प्रयागराज की कुलपति प्रो. उषा टंडन, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप बोस, रिलायंस कॉरपोरेट अफेयर्स के उपाध्यक्ष एसके घोष पहुंचे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. अर्चना मिश्रा ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। कुलपति प्रो. अर्चना मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम में न्यायाधीश जस्टिस संजय करोल ने कहा कि आज हम एक संवैधानिक व्यवस्था में हैं। भारतीय संविधान में न्यायपालिका को लोकतंत्र का तीसरा स्तंभ माना गया है। यह तभी मजबूत रहेगा, जब न्यायाधीशों व अधिवक्ताओं के बीच आपसी तालमेल बेहतर हो। जस्टिस करोल ने छात्र छात्राओं को अच्छा इंसान बनने व देश का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया।
विज्ञापन

जस्टिस सुधीर कुमार जैन ने कहा कि देश में जितने भी अधिनियम व नियम विद्यमान हैं या जो भविष्य में सरकार की तरफ से बनाए जाएंगे, वह संविधान की मूल भावना के अनुसार ही हो सकते हैं। विधि के विद्यार्थी सामान्य विद्यार्थियों की तुलना में ज्यादा सक्रिय होते हैं। वह अन्याय के खिलाफ सीधे आवाज उठाते हैं। उन्होंने लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की कार्य प्रणाली पर प्रकाश डाला।
अधिवक्ता अनूप बोस ने कहा कि अधिवक्ता अपने केस पर अच्छी मेहनत करेंगे तभी जज सही और सटीक फैसला सुना सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रो बोनो स्कीम से जुड़कर आम लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए कहा।
एसके घोष ने कहा कि कानूनी सहायता लेने पर आने वाला खर्च जिलास्तरीय कानूनी सेवाएं अथार्टी की तरफ से अदा किया जाता है। कोई भी व्यक्ति जिलास्तर पर खोले गए लीगल एंड क्लीनिक से संपर्क कर मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।
प्रो. उषा टंडन ने प्रो बोनो क्लब को अच्छी योजना बताया। उन्होंने कहा कि हमने पैराडाइज लीगल कोर्स शुरू किया है। इसके तहत विद्यार्थी लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को न्याय के कई प्रोफेशनल इथिक्स बताए। तकनीकी सेशन में जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रवीन कुमार सिंह, प्रशांत तिवारी, सीसीआई के निदेशक राजेंद्र कुमार व क्लब के नोडल अधिकारी संजय कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। डीन प्रो. आशुतोष ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें