नारनौल जिले के सिंघाना रोड बाईपास पर कार के पेड़ से टकराने से काल के ग्रास बने पांच लोगों में सैदपुर के सेवानिवृत्त फौजी हंसराज भी शामिल थे। हादसे का पता लगने के बाद सैदपुर गांव में भी मातम छा गया है। शाम को गमगीन माहौल में हंसराज के शव का अंतिम संस्कार किया गया, जहां पर उन्हें सेना की टुकड़ी ने सलामी दी।
गांव सैदपुर निवासी हंसराज (45) सेना से सेवानिवृत्त हुए थे। वह फिलहाल दिल्ली कैंट की इंजीनियरिंग ब्रांच में बतौर सिविल डिफेंस पर्सन (नागरिक सुरक्षा कर्मी) तैनात थे। हंसराज अपने सहकर्मी गांव बापड़ोली, नारनौल निवासी प्रेम सिंह के पोते के जन्मदिन पर उनके पैतृक गांव गए थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वह रात को अपने साथी कर्मियों बसंत विहार निवासी जयभगवान, नारनौल की पुरानी सराय निवासी गौतम, तुर्कपुर गुरुग्राम निवासी हजारीलाल और दिल्ली के तिलक नगर निवासी ओमप्रकाश के साथ वापस दिल्ली के लिए निकले थे। सिंघाना रोड बाईपास पर उनकी कार एक पेड़ से टकरा गई और सभी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना परिजनों को लगी तो कोहराम मच गया । परिजनों का रोकर बुरा हाल था। सैदपुर निवासी हंसराज के भरे-पूरे परिवार में उनके माता-पिता, दो भाई, पत्नी व तीन बच्चे हैं। उनका बड़ा बेटा पुनित स्नातक की पढ़ाई कर रहा है वहीं उससे छोटी बेटी ने 12वीं कक्षा पास की है। जबकि सबसे छोटी बेटी आठवीं कक्षा में पढ़ती है। हंसराज के पिता दिल्ली विकास प्राधिकरण से सेवानिवृत्त हो चुके हैं वहीं बड़ा भाई राकेश रोहतक में रहते हुए कपड़े का कारोबार करता है। छोटा भाई ललित बवाना, दिल्ली में दुकान किए हुए हैं। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य नारनौल के सामान्य अस्पताल में शव लेने के लिए पहुंचे। गांव में भी जब हंसराज की हादसे में मौत हो जाने की सूचना पहुंची तो ग्रामीण हंसराज के घर पहुंचना शुरू हो गए और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया। अचानक हुए हादसे में हंसराज को खो देने से पूरा परिवार सहमा हुआ है। शाम को पोस्टमार्टम होकर हंसराज का शव गांव पहुंचा, जिनकी अंतिम यात्रा में काफी संख्या में लोग पहुंचे। इस दौरान सेना की टुकड़ी ने पहुंचकर उन्हें सलामी दी, जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया।