फोटो 51- नरेंद्र नगर स्थित शिव मंदिर के आचार्य मनमोहन मिश्रा।
सोनीपत। सनातन धर्म में किसी भी निर्माण कार्य से पहले भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। उन्हें सृष्टि का पहला इंजीनियर, शिल्पकार व वास्तुकार भी माना गया है। हर वर्ष आमतौर पर 17 सितंबर को ब्रह्माजी के सातवें पुत्र एवं सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाकर उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार हर विश्वकर्मा पूजा आज होगी। इस वर्ष सोमवार को सूर्य देव कन्या राशि में गोचर करेंगे।
नरेंद्र नगर स्थित शिव मंदिर से आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि मान्यता है कि संसार में निर्माण संबंधी सभी कार्य भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से ही पूरे होते हैं। हर वर्ष 17 सितंबर को सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा की जाती है। खासतौर पर फैक्टरी, हथकरघा से जुड़े लोग विश्वकर्मा जयंती पर उनकी आराधना करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा इसी दिन समुद्र मंथन में प्रकट हुए थे। आचार्य मनमोहन मिश्रा ने कहा कि सूर्य देव जब सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में गोचर करते हैं, उसी तिथि को विश्वकर्मा पूजा की जाती है। विश्वकर्मा पूजन की सही तिथि को लेकर लोगाें में असमंजस की स्थिति बनी है। हर साल भाद्रपद माह में सूर्यदेव के कन्या राशि में गोचर करने की तिथि को विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। यही कारण है कि यह तिथि कभी 17 सितंबर के बजाए एक दिन पहले या बाद में भी पड़ सकती है।
भगवान विश्वकर्मा ने किया जगन्नाथ पुरी का निर्माण
विश्वकर्मा पुराण के अनुसार मान्यता है कि भगवान श्रीहरि विष्णु ने सबसे पहले ब्रह्माजी व फिर विश्वकर्मा जी की रचना की थी। ब्रह्माजी के निर्देश पर ही भगवान विश्वकर्मा ने पुष्पक विमान, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारिका व हस्तिनापुर, कलयुग में जगन्नाथ पुरी का निर्माण किया। साथ ही भगवान विश्वकर्मा ने वास्तु शास्त्र का ज्ञान, यंत्र निर्माण विद्या के बारे में ही जानकारी दी।
यह रहेगा शुभ मुहूर्त
भगवान विश्वकर्मा पूजन के लिए सोमवार 16 सितंबर को सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जो विश्वकर्मा पूजन के लिए सबसे शुभ मुहूर्त माना गया है। विश्वकर्मा जयंती के दिन पूजा के दौरान 21 बार ऊॅं आधार शक्तपे नम:, ओम कूमयि नम:, ओम अनंतम नम:, पृथिव्यै नम: मंत्र का जांच करने से अधिक लाभ की प्राप्ति होती है।