सोनीपत। जिला पार्षदों ने अपनी मांगों को लेकर ऊंट पर बैठकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने बुधवार दोपहर छोटूराम चौक से लेकर लघु सचिवालय तक ऊंट को साथ लेकर जुलूस निकाला। लघु सचिवालय के गेट पर तहसीलदार जिवेंद्र मलिक को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, साथ ही 12 जुलाई को चंडीगढ़ में होने वाली कैबिनेट की बैठक में जिला पार्षदों की लंबित मांगों को पूरा करने की मांग उठाई। इसके बाद जिला पार्षद डीआरडीए हॉल के बाहर पहुंचे। कुछ देर तक नारेबाजी करने के बाद जिला परिषद की बैठक का बहिष्कार कर दिया।
जिला पार्षद संजय बड़वासनी, संत कुमार ने कहा कि उनका पद ऊंट के समान ऊंचा तो है, लेकिन काम जीरे के समान है। सरकार से अधिकार नहीं मिलने के कारण वह काम नहीं करा पा रहे हैं। सरकार की तरफ से पार्षदों को कोई ग्रांट नहीं दी जा रही। इससे लोगों की समस्याओं का निस्तारण नहीं कर पा रहे हैं। खुद का बजट न होने के कारण गांवों में विकास कार्य करवाने में पार्षद सक्षम नहीं हैं। उनकी मांग है कि सांसद व विधायक की तर्ज पर जिला पार्षदों को अलग से 50 लाख रुपये का बजट प्रतिवर्ष दिया जाए। पंचायत में काम बांटने के कारण जिला पार्षदों की शक्तियां कम कर दी गई हैं। उनको काम करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। जिला परियोजना समिति का गठन किया जाए और पेंशन की व्यवस्था की जाए। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो प्रदेशभर के जिला पार्षद मुख्यमंत्री आवास पर धरना शुरू कर देंगे।
इसके बाद जिला पार्षद अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय परिसर में डीआरडीए हॉल के बाहर पहुंचे और नारेबाजी की। उन्होंने जिला परिषद की बैठक का बहिष्कार किया। इस पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाॅ. सुशील मलिक ने बैठक स्थगित कर दी। प्रदर्शन के दौरान जिला परिषद की वाइस चेयरपर्सन कल्पना, पार्षद रवि इंदौरा, सतीश कुमार, संत कुमार, राजेश गंगाना, देवेंद्र कुमार समेत अन्य पार्षद भी मौजूद रहे।
गांवों के विकास कार्यों को लेकर जिला पार्षदों की बैठक बुलाई गई थी। जिला पार्षद अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे थे, जिसके चलते उन्होंने बैठक में भाग लेने से मना कर दिया। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की जानी थी, लेकिन पार्षदों के नहीं पहुंचने के कारण बैठक को स्थगित कर दिया। जल्द ही दोबारा बैठक बुलाई जाएगी।
- डॉ. सुशील मलिक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद सोनीपत