हरियाणा के सोनीपत के कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में कड़ाके की ठंड के बीच कलयुगी मां अपने नवजात बेटे को कैरी बैग में रखकर मरने के लिए छोड़ गई। उस मासूम के लिए तीन युवा फरिश्ता बनकर पहुंच गए। बच्चे के रोने की आवाज सुनी तो उन्होंने उसे उसे उठाकर अपनी रिश्ते की बहन गीता के पास ले गए।
गीता ने मानवता का फर्ज निभाते हुए बिलखते मासूम को अपने सीने से लगा लिया और उसे अपना दूध पिलाकर उसकी भूख मिटाई। गीता ने दूसरे के कलेजे के टुकड़े को अपना बनाकर उसका लालन-पालन किया। एक तरफ जहां उसकी मां उसे मरने को छोड़ गई थी, वहीं गीता ने मां का फर्ज निभाते हुए उसका जीवन बचाया।
नूतन वर्ष का आगमन हो चुका था। रात साढ़े 12 बजे का समय था। पौष के महीने की कड़ाके की ठंड के बीच जिले का न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री सेल्सियस था। तीन युवक मूलरूप से उत्तराखंड के जिला गढ़वाल के गांव खोला फिलहाल दिल्ली के देवली स्थित संगम विहार निवासी सरजीत सिंह रावत व मूलरूप से बिहार के जिला सिवान के गांव पुरैना फिलहाल दिल्ली के गांव सिंघु निवासी गुलशन कुमार व उसके भाई विशाल कुमार के साथ आधी रात को न्यू ईयर पार्टी करने के बाद अपने कमरे पर लौट रहे थे।
कड़ाके की ठंड के चलते सड़क सुनसान थी। सरजीत ने बताया कि कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में पहुंचे तो टी-प्वाइंट पर नीले रंग का कैरी बैग दिखाई दिया। उसमें से ठंड से कांपते मासूम की दबी-दबी चीख निकल रही थी। सरजीत के साथ उसके दोस्त गुलशन व उनके भाई विशाल के कदम आवाज सुनकर ठिठक गए।
उन्होंने देखा कि नीचे रंग के कैरी बैग के अंदर से आवाज आ रही है। मोबाइल की टॉर्च जलाकर देखा तो बैग पर अंग्रेजी में कुल्लू रिशाल फैशन लिखा था। कैरी बैग को खोला तो लाल-सफेद रंग की चादर में लिपटा मासूम रो रहा था।
उसका चेहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था। वह उठाकर तुरंत अपनी रिश्ते की बहन गीता के पास पहुंचे। गीता प्याऊ मनियारी में ही किराये के कमरे में अपनी तीन बेटियों व पति के साथ रहती है। गीता ने भी मां का फर्ज का निभाते हुए मासूम को कलेजे से लगा लिया और अपना दूध पिलाकर उसके जीवन को बचाया।
घटना के बाद घबरा गए थे तीनों युवक
सरजीत ने बताया कि कुछ देर पहले तक वह नववर्ष की पार्टी मनाते हुए नाच-गाने के साथ लजीज व्यंजन खा रहे थे। उसके कुछ देर बाद ही रात करीब 12 बजकर 25 मिनट पर टी-प्वाइंट पर बच्चे के रोने की आवाज सुनने और बैग में मासूम को देखकर वह घबरा गए। वह तीनों ही अविवाहित हैं। ऐसे में बच्चे के लालन-पालन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होने पर उन्होंने सबसे पहले मासूम की जान बचाना बेहतर समझा और उसे रिश्ते की बहन गीता के पास ले गए। नवजात की गर्भनाल तक नहीं काटी गई थी।
तीन बेटियों की मां गीता ने अपना दूध पिलाकर बच्चे की भूख को शांत किया
मूलरूप से यूपी के जिला फर्रुखाबाद फिलहाल प्याऊ मनियारी निवासी गीता को जब उनके भाइयों ने मासूम को सौंपा तो वह ठंड से ठिठुरने के साथ ही भूखा भी था। तीन बेटियों की मां गीता की सबसे छोटी बेटी महज सात माह की है। ऐसे में वह बेटी को अपना दूध पिलाती है। जब सरजीत व उसके साथियों ने नवजात को उसकी गोद में डाला तो उन्होंने मातृत्व की भावना के साथ उसे दूध पिलाया। छह दिन तक उसने मासूम को अपने साथ रखा और उसका मां की तरह लालन-पालन कर उसकी जिंदगी बचाई।
पहले भी मिल चुके हैं नवजात
- 5 मई, 2022 को श्रीकुंज कॉलोनी में नवजात का शव मिला, उसे कुत्तों ने नोच रखा था।
- 19 अक्तूबर, 2021 को बहालगढ़ रोड स्थित एक अस्पताल के पास झाड़ियों में नवजात मिला।
- 30 सितंबर, 2021 को बिंदरौली के पास नवजात का शव मिला।
- 28 सितंबर, 2021 को कथूरा में गन्ने के खेत में नवजात मिला। किसान ने पुलिस को सौंपा।
- 20 अप्रैल, 2021 को जठेड़ी के पास नवजात का शव मिला।
- 12 फरवरी, 2021 को गन्नौर में नवजात मिला। पुलिस जांच में सामने आया कि मध्य प्रदेश की अविवाहित युवती ने बच्चे को जन्म दिया था।