सोनीपत। पेरिस पैरालंपिक की जेवलिन थ्रो की एफ-64 स्पर्धा में दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतने के बाद सुमित आंतिल के पैतृक गांव खेवड़ा में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों व निवास स्थान पर मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई जा रही है। मां निर्मला देवी ने कहा कि बेटे सुमित ने पदक जीतकर देश, प्रदेश व गांव का नाम रोशन कर दिया है। बेटे के देश लौटने पर भव्य स्वागत किया जाएगा।
मां निर्मला देवी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सुमित ने पैरालंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। बेटे ने महज 16 साल की आयु में सड़क दुर्घटना में अपना पैर खो दिया था, लेकिन कभी हार नहीं मानी। वह पहले कुश्ती करता था। दुर्घटना के बाद जेवलिन खेलना शुरू किया था। उन्होंने बताया कि बेटे सुमित ने प्रतियोगिता के लिए जी तोड़ मेहनत की थी। वह सुबह शाम करीब छह से सात घंटे अभ्यास करते थे। जिसका फल उन्हें मिला मिला हैं। अब लगातार पदक जीत कर देश व प्रदेश का नाम ऊंचा कर रहा है। उन्होंने बताया कि बेटे के लौटने पर उसकी मनपसंद चीज बनाकर खिलाउंगी।
सुमित आंतिल के चाचा सतबीर ने बताया कि बेटे ने शानदार खेल दिखाया है। सुमित शुरुआत से ही कहता था कि अपनी मेहनत से देश व परिवार का नाम रोशन करुंगा। आज बेटे सुमित ने स्वर्ण जीतकर हमारा मान बढ़ाया है। पत्नी शीतल ने बताया कि स्वर्ण पदक जीतने की बेहद खुशी है। अगर विश्व रिकार्ड टूट जाता तो सोने पर सुहागा हो जाता। उन्होंने बताया कि सुमित पूरी लगन से अपनी मेहनत पर ही ध्यान रखते थे। उन्होंने जाने से पहले ही कहा था कि पदक हमारा ही है और उन्होंने देश की झोली में दूसरी बार स्वर्ण पदक डाला है। उन्होंने बताया कि हमारा बेटा भी बहुत भाग्यशाली है। सुमित आंतिल ने इससे पहले टोक्यो पैरालंपिक में भी स्वर्ण पदक जीता था।