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सोनीपत: महिलाओं ने पंचायत कर कहा - हमारे लिए आरक्षित सीट, हम ही लेंगे फैसला कौन बगेगा सरपंच

Mon, 24 Oct 2022 12:54 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत

सार

गांव रिढाऊ में पुरुष वर्ग के फैसले के खिलाफ महिला शक्ति उतरी है। महिलाएं बोलीं कि पुरुषों की तरफ से बिना उनकी सहमति के लिये गए फैसलों को स्वीकार नहीं करेंगी। अब महिलाओं ने फैसले का विरोध किया और कहा सीट हमारी तो हम ही लेंगी फैसला।
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गांव रिढाऊ में हुई पंचायत में महिलाओं को संबोधित करती महिला। संवाद - फोटो : Sonipat
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विस्तार
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गांव रिढाऊ में तीन दिन पहले हुई पंचायत में पुरुषों की तरफ से महिला सरपंच का चुनाव सर्वसम्मति से करने के फैसले का गांव की महिलाओं ने विरोध किया है। महिलाओं ने रविवार को गांव की चौपाल में एकत्रित होकर पंचायत की। महिलाओं ने कहा कि गांव में इस बार सरपंच पद महिला के लिए आरक्षित है।

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इसलिए महिला की सीट अगर सर्वसम्मति बनाती है तो पुरुषों के साथ पंचायत में महिलाओं को भी शामिल कर कोई निर्णय लिया जाए। पंचायत के दौरान महिलाओं ने एक महिला को प्रत्याशी बनाया है और कहा है कि अगर गांव को इस फैसले पर एतराज है तो वह चुनाव लड़ने को तैयार हैं। अगर गांव में किसी महिला को सरपंच बनाने पर सर्वसम्मति बनानी है तो महिलाओं से ही पूछकर उस पर फैसला होना चाहिए, ना कि पुरुष वर्ग अपने स्तर पर फैसला लेकर उसे महिलाओं पर थोप दें।

गांव रिढाऊ में पंचायत चुनाव में सरपंच पद को लेकर तीन दिन पहले पंचायत हुई थी। जिसमें पुरुष वर्ग ने फैसला कर दिया कि एक व्यक्ति के परिवार से किसी महिला को सरपंच बना दिया जाए। पुरुषों की तरफ से महिला सरपंच को लेकर किए गए फैसले का पता लगने पर गांव की महिलाओं ने ना केवल एतराज जताया, बल्कि रविवार को गांव में पहली महिला पंचायत तक रख थी।
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जिसमें भारी संख्या में महिलाओं ने अपनी भागीदारी दर्ज करवाई। महिलाओं ने कहा कि वह पुरुषों की पंचायत में महिला सरपंच को लेकर लिए गए फैसले को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगी। महिलाओं ने कहा कि ग्रामीण आंचल में समझा जाता है कि महिलाएं अगर पंचायत कर फैसले लेंगी तो यह पुरुषों की तौहीन होगी, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। महिलाएं अपने अधिकारों को पहचानती हैं और यह भी जानती हैं कि गांव की सरपंच चुनने के दौरान पुरुषों ने जो फैसला लिया है, उसमें महिलाओं के अधिकारों का हनन हुआ है, लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
हमारा पद, फैसले में हमारी सहमति जरूरी
पंचायत में महिलाओं ने स्पष्ट किया कि यह पद उनका है और इस पर फैसला भी वहीं लेंगी। ऐसे में इस पंचायत में वह एक महिला को अपना प्रत्याशी बना रही हैं। अगर गांव को इस पर सहमति बनानी है तो गांव बना ले, अगर उनके फैसले पर एतराज है तो वह चुनाव में उतरने के लिए भी तैयार हैं।

फैसला देगा प्रदेश भर को संदेश
रिढाऊ गांव में जिस प्रकार से महिलाओं ने एकत्रित होकर पुरुषों के फैसले को नकारा है और पंचायत कर खुद अपना फैसला सुना दिया है। यह अपने आप में बड़ी बात है और आने वाले समय में प्रदेश भर को एक संदेश देने का काम करेगा कि दुनिया की आधी आबादी अब मेट्रो सिटी में ही नहीं बल्कि एक गांव में भी जागरूक हो चुकी है। वह अब अपने अधिकारों की आवाज उठाने लगी है। अगर अधिकार नहीं मिलता है तो वह उसे छीनने का भी दम रखने लगी हैं।

महिलाओं ने अपने हक की आवाज बुलंद की
ऐसा पहली बार हुआ जब पुरुष प्रधान समाज की पहचान लिए हुए हरियाणा के गांव रिढाऊ में महिलाओं की पंचायत में महिलाएं ने एक के बाद एक फैसले लिए और अपने हक की आवाज को बुलंद किया। वहीं इस पंचायत को देखने के लिए गांव के पुरुष भी भारी संख्या में पहुंचे और महिलाओं की पंचायत में लिए जा रहे फैसलों को सुना। एक समय ऐसा भी था कि जब हरियाणा का नाम बेटियों को कोख में ही कत्ल कर दिए जाने को लेकर लिया जाता था। यह बदलाव की बयार ही है कि पुरुषों के कंधों से कंधा मिलाकर आज महिलाएं अपनी पंचायत कर रही हैं और पूरे समाज को एक संदेश देने का काम किया जा रहा है। जो प्रदेश ही नहीं देश में नजीर बनने जा रहा है।

गांव रिढाऊ में सरपंच पद को लेकर हुई महिलाओं की पंचायत में पहुंचे पुरुष महिलाओं की बातें सुनते हु?- फोटो : Sonipat

 

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