फोटो 16: सोनीपत के गन्नौर स्थित प्रधानावास मोहल्ले में श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करती कथावाचक स
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गन्नौर। श्री शिव मंदिर सनातन धर्म सभा गन्नौर की ओर से प्रधानावास मोहल्ले में संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथावाचक साध्वी समाहिता ने श्रीवामन अवतार व समुद्र मंथन का वृतांत सुनाया। साध्वी ने बताया कि राजा बलि ने वामन अवतार को तुच्छ समझा और उन्हें तीन पग जमीन दे दी। कथा में बताया कि राजा बलि क्षीर सागर निवासी भगवान कृष्ण की लीला को समझ नहीं पाए और उन्हें पाताल जाना पड़ा। वामन कथा हमें भेदभाव ऊंच-नीच, छुआछूत त्यागने की प्रेरणा देती है। कथा में समुद्र मंथन का प्रसंग भी विशेष महत्व रखता है। कथा के अनुसार अमृत प्राप्ति के लिए देवताओं और असुरों ने भगवान विष्णु की प्रेरणा से क्षीर सागर का मंथन किया। इसमें मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया। मंथन के दौरान सबसे पहले हलाहल विष निकला, जिसे सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया। इसके बाद लक्ष्मी सहित अनेक दिव्य रत्न प्रकट हुए।