दिवाली पर्व पर वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पटाखे जलाने पर लगाए गए प्रतिबंध के आदेश धुएं में उड़ते दिखाई दिए। लोगों ने शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक जमकर पटाखे जलाए। देर रात बम-पटाखों के फोड़ने की आवाजें गूंजती रहीं, जिससे दिवाली पर प्रदूषण खतरनाक स्तर तक जा पहुंचा। लोगों को सांस लेने में कुछ तकलीफ हुई। साथ ही आंखों में जलन भी महसूस हुई।
दिवाली पर पटाखे जलाने के कारण एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 220 तक पहुंच गया। हालांकि हवा का एक्यूआई 100 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब तक होना चाहिए। जिला प्रशासन ने वायु शुद्ध रखने के लिए व्यापक तैयारी की थी। इस कड़ी में बम-पटाखे जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। दिवाली से पहले ही जिला प्रशासन की तरफ से विभिन्न माध्यम से लोगों को पटाखा रहित दिवाली मनाने के लिए जागरूक किया जाता रहा था, लेकिन दिवाली के उल्लास में लोग सभी नियम भूल गए और देर रात तक जमकर बम-पटाखों की आवाजें गूंजती रहीं। हालांकि काफी लोग ऐसे भी रहे, जिन्होंने नियमों का पालन करते हुए ग्रीन पटाखे ही जलाए।
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खराब स्तर पर पहुंचा वायु गुणवत्ता स्तर
दिवाली को देर रात तक बम-पटाखे जलाने से जिले में वायु गुणवत्ता का स्तर खराब स्तर तक पहुंच गया था। इससे पहले कई दिनों तक जिले का एक्यूआई 150 के आसपास बना हुआ था। दिवाली पर बम-पटाखे जलाने से देर रात तक वायु गुणवत्ता स्तर 220 तक पहुंच गया था। वातावरण में कुछ समय के लिए प्रदूषण की परत भी छाई रही। मंगलवार को पीएम-2.5 जहां 227 बना रहा, वहीं पीएम-10 का स्तर 368 पर थमा रहा। मंगलवार को दोपहर बाद तक एक्यूआई गिरकर 212 तक पहुंचा, जो सेहत के लिए खराब है। इससे लोगों की आंखों में जलन व सांस लेने में हलकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मुंह पर मास्क लगाकर निकले बाहर
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने बताया कि दिवाली पर पटाखे जलाने से प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। जिससे सांस की बीमारी होने की आशंका ज्यादा रहती है। जिन लोगों को पहले से सांस की बीमारी है, उनके लिए यह धुआं हानिकारक होता है। धुएं से आंखों में जलन की शिकायत भी रहती है। ऐसे वातावरण में ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। शरीर के अंदर गए कण ठंडा पानी पीने से जम जाते हैं। डॉ. शैलेंद्र राणा ने सलाह दी कि ऐसे वातावरण में अगर घर से बाहर निकलना पड़े तो मुंह पर मास्क जरूर लगाएं। साथ ही आंखों को दिन में कई बार पानी से धोते रहें।
इस तरह होता है औसत एक्यूआई
0-50 अच्छा
51-100 औसत
101-200 मॉडरेट
201-300 खराब
301-400 ज्यादा खराब
400 से ज्यादा बेहद खतरनाक
दिवाली पर वायु प्रदूषण ना हो, इसके लिए बम-पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया था। यही नहीं लोगों को पटाखे न जलाने के लिए जागरूक भी किया गया था। इसके बावजूद भी शहर में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने बम-पटाखे जलाए हैं। हालांकि काफी लोग ऐसे भी रहे हैं, जिन्होंने ग्रीन पटाखों का ही प्रयोग किया है। त्योहारी सीजन में प्रदूषण को फैलने से रोकने के लिए लगातार कारगर कदम उठाए जा रहे हैं। -ललित सिवाच, उपायुक्त, सोनीपत