लघु सचिवालय में मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के सदस्य। संवाद
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हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ से संबंधित सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर जिले के शिक्षकों ने वीरवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान अध्यापकों ने मुख्यमंत्री के नाम उपमंडल अधिकारी नागरिक शशि वसुंधरा को ज्ञापन दिया।
जिला सचिव नरेंद्र चहल ने कहा कि सरकार सार्वजनिक शिक्षा को बढ़ावा देने की जगह सरकारी विद्यालयों से बच्चों को बाहर करने की योजनाएं बना रही है। चिराग योजना के तहत सरकारी विद्यालयों से निजी विद्यालयों में दाखिला लेने वाले बच्चों की फीस सरकार देगी, जिससे सरकारी विद्यालयों में पढ़ने के लिए कौन आएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नई स्थायी भर्ती करने की जगह सेवानिवृत्त अध्यापक को दोबारा विद्यालयों में रखा जा रहा है। दूसरे प्रदेशों के अध्यापकों को विद्यालयों में पढ़ाने के लिए बुलाया जा रहा है।
जिला प्रधान जोगिंद्र सिंह ने कहा कि 5 किलोमीटर के अंदर व कम विद्यार्थियों की संख्या वाले विद्यालयों को मर्ज करने की योजना सही नहीं है। पहली से 12वीं तक के एक गांव के सभी विद्यालयों को मर्ज करने का निर्णय गलत है। बच्चों को 3 साल से किताबें नहीं दी जा रही हैं। सालों से अध्यापकों की नियमित भर्ती नहीं हुई है। 6 साल से अध्यापकों के ऑनलाइन तबादले नहीं किए गए हैं। मेवात में एनजीओ की ओर से अध्यापकों की अस्थायी भर्ती की जा रही है। अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है। अध्यापक मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। दाखिलों में शर्तें लगाने जैसी योजनाएं सरकारी विद्यालयों पर थोपी जा रही हैं। जिससे अध्यापकों के पदों को समाप्त किया जा सके। जिला कोषाध्यक्ष रोहताश गंगाणा ने कहा कि हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ इन योजनाओं का कड़ा विरोध करता है। उनकी मांग है कि इन योजनाओं को तुरंत वापस लिया जाए। सार्वजनिक शिक्षा के ढांचे को मजबूत किया जाए, अन्यथा राज्य स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर जयभगवान, शिलकराम, रणबीर, दिनेश छिक्कारा, रामप्रसाद, कुलदीप, रोहतास चहल, पवन, जगत सिंह, अनिल, जगमेंद्र व कृष्ण शर्मा मौजूद रहे।