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7 मांगों के साथ प्रशासन को दिया 72 घंटे का अल्टीमेटम

Tue, 15 Mar 2016 12:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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लघु सचिवालय जाते जाट संघर्ष समिति के नेता। - फोटो : bureau
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले सोमवार को सैकड़ों लोग लघु सचिवालय पहुंचे। लगभग एक घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद डीसी को एसपी और अन्य अधिकारियों के सामने ज्ञापन दिया गया। इस दौरान नेताओं ने अपनी 7 मांगें रखीं और प्रशासन को 72 घंटों के अंदर इन मांगों पर अमल करने का अल्टीमेटम दिया। प्रदर्शन के दौरान साफ तौर पर कहा गया कि अगर ये मांगें नहीं मानीं गईं तो जाट समुदाय फिर से सड़कों पर उतर आएगा। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। दूसरी ओर प्रदर्शन के तुरंत बाद ही डीसी ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जिले में धारा-144 लगा दी। बता दें कि लघु सचिवालय स्थित पार्क में सुबह 11 बजे के करीब जाट समुदाय के लोग एकत्र होने शुरू हो गए थे। लगभग 12.30 बजे तक यहां अच्छी-खासी भीड़ हो गई थी। सैकड़ों की संख्या में आए लोगों को संबोधित करते हुए अलग-अलग नेताओं ने अपने-अपने विचार रखे। सभी ने सरकार के समक्ष उनकी मांगों को मानने का अल्टीमेटम दिया। इस दौरान 7 मांगों का मांगपत्र तैयार किया गया। जिसे डीसी केएम पांडुरंग के सुपुर्द किया गया। कार्यक्रम के दौरान आंदोलन के दौरान मारे गए समुदाय के लोगों के लिए 2 मिनट का मौन भी रखा गया। डीसी के साथ एसपी अभिषेक गर्ग, एसडीएम निशांत यादव, डीएसपी मुकेश जाखड़, प्रदीप कुमार एवं अन्य अधिकारीगण मौजूद था।  
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एसडीएम से समय, डीसी को ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों को ज्ञापन लेने की जल्दी दिखाई दी। दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे ज्ञापन लेने के लिए प्रदर्शनकारियों के बीच एसडीएम निशांत यादव पहुंच गए थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। लोगों ने आधे घंटे का समय मांगते हुए एसडीएम को वापस भेज दिया। बाद में लगभग डेढ़ बजे जब अधिकारियों के पास बुलावा भेजा गया तो अधिकारी भी तुरंत उठकर आए और ज्ञापन ले लिया।

चौकस बल रह गया एकतरफ
जाट समुदाय के आरक्षण के लिए प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ी की ड्यूटी लघु सचिवालय में तैनात की गई थी। इसका कोई फायदा भी नहीं हुआ। क्योंकि समुदाय के लोगों ने पार्क में प्रदर्शन किया, वहीं पुलिस बल सचिवालय के बाहर तैनात रहा।
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एक-एक करोड़ रुपये देने का ऐलान
प्रदर्शन के दौरान समुदाय के लोगों ने समुदाय के उन परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है, जिनके बच्चे आंदोलन के दौरान मारे गए हैं। यह राशि समाज के लोग स्वयं एकत्र करके देंगे। इस दौरान भाकियू नेता सत्यवान नरवाल ने संस्था बनाक ऐसे बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाएगी

ये रखी मुख्य मांगें...
1. प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान गोली चलवाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
2. आंदोलन में मारे गए युवकों को शहीद का दर्जा।
3. पिछले और हाल ही में हुए आंदोलन के दौरान जो मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें रद्द किया जाए।  
4. बीसी-बी कैटेगरी में आरक्षण चाहिए, चाहे उसे 11 से बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया जाए।
5. गृहमंत्री राजनाथ सिंह और सीएम मनोहर लाल खट्टर द्वारा किए गए वादे तुरंत पूरे किए जाएं।
7. परिवारों को उचित मुआवजा और आश्रितों को नौकरी दी जाए।

डीसी ने लागू की धारा 144
जिला मजिस्ट्रेट केएम पांडुरंग ने अपराध प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा-144 के तहत जिले में निषेधाज्ञा लागू करने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश तुरंत प्रभाव से क्रियाशील हो गए हैं और 13 मई 2016 तक लागू रहेंगे। केएम पांडुरंग ने अपने आदेशों में कहा कि  किसी भी प्रकार के तनाव, बाधा, जान  और माल की हानि को रोकने तथा जिले की परिधि में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से निषेधाज्ञा लागू की गई है। आदेशों में कहा गया है कि जानमाल की हानि को रोकने, सार्वजनिक स्थलों पर शांति बनाए रखने तथा दंगों को रोकने के लिए निषेधाज्ञा लगाना आवश्यक है। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर आईपीसी-धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध है।
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