रोहतक। सोमवती अमावस्या सोमवार 8 अप्रैल को चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर है। इसे चैत्र अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता है कि अगर जीवन में बाधाएं आ रही हैं तो सोमवती अमावस्या पर पितरों की नाराजगी दूर करके उन्हें प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना और पिंडदान से उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं। इस दिन पितरों के साथ-साथ भगवान शिव की भी आराधना की जाती है। सोमवती अमावस्या तिथि 8 अप्रैल सुबह 3:11 से रात्रि 11:50 तक है।
-पवित्र स्थल पर करें पिंडदान
अमावस्या के दिन किसी भी पवित्र स्थल पर जैसे कि हरिद्वार, कुरुक्षेत्र व प्रयागराज आदि स्थान पर पिंडदान करने से पितृ देवता संतुष्ट होते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। पिंडदान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
अमावस्या पर पितृ गायत्री का करें जाप
अमावस्या के दिन अपने पितरों को भोजन जल और अन्य वस्तुएं अर्पित करें। तर्पण और श्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए। साथ ही पितृ गायत्री मंत्र (ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात् ) या फिर गायत्री मंत्र जपना चाहिए। इसके साथ पूर्वजों को समर्पित अन्य मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं।
-अमावस्या के दिन क्या करें और क्या न करें
पंडित सुनील शास्त्री सामड़ ने बताया कि इस दिन मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन चना, मसूर दाल सरसों का साग और मूली नहीं खानी चाहिए। किसी भी जीव को परेशान नहीं करना चाहिए। इस दिन किसी का अपमान और क्रोध नहीं करना चाहिए। कोई भी शुभ समारोह जैसे सगाई, शादी, गृह प्रवेश मुंडन आदि नहीं करना चाहिए। पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था जरूर करनी चाहिए। तिल का दान अवश्य करना चाहिए। इससे पितृ दोष दूर होते हैं। साथ ही दूध-चावल का दान करना चाहिए। इससे आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है।