सोनीपत। मुंबई, गुजरात, अयोध्या जैसे शहरों में रामलीला मंचन के दौरान रावण के किरदार में सीताराम 25 वर्षों से दहाड़ रहे हैं। जबकि चंद्रभूषण 8 वर्ष से श्रीराम का रूप धारण कर उनकी भक्ति में लीन हैं। इन दिनों ये कलाकार सोनीपत में श्री रामलीला सभा की ओर से कामी रोड स्थित मैदान में रामलीला मंचन कर वाहवाही लूट रहे हैं। वृंदावन से पहली बार सोनीपत पहुंचे कुंज बिहारी रामलीला मंडल ट्रस्ट के 26 सदस्य अपना किरदार निभाकर लोगों के दिलों में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। उन्होंने कोरोना काल में भी बंद कमरे में ठाकुरजी के सामने रामलीला का मंचन कर अपनी कला का प्रदर्शन किया।
मंडल का नेतृत्व कर रहे वृंदावन निवासी बृजगोपाल कौशिक का कहना है कि उनका उद्देश्य रामलीला का मंचन कर सिर्फ श्रीराम की भक्ति करना है। आज के दौर में कुछ जगह रामलीला मंचन के नाम पर फिल्मी गानों पर नृत्य कर व हुल्लड़पन से रामलीला का माहौल बिगाड़ा जा रहा है। यह पाप है। वह सनातन धर्म की जागृति व रामलीला के बिगड़े माहौल को संवारने का प्रयास कर रहे हैं। इसी उद्देश्य से तीसरी पीढ़ी के रूप में उन्होंने रामलीला मंचन करने का निर्णय लिया। उनकी 3 पीढ़ियां 100 वर्षों से रामलीला का मंचन कर रही है। आज विभिन्न प्रदेशों में रामलीला का मंचन कर लोगों के दिलों में श्रीराम भक्ति की अलख जगाने का प्रयास कर रहे हैं।
बृजगोपाल कौशिक ने कहा कि कलियुग में केवल राम नाम ही ऐसा कल्पवृक्ष है जो मनोवांछित फल प्रदान कर कल्याण करने वाला है। रामलीला मंचन के लिए वृंदावन के 20 किलोमीटर के क्षेत्र से ही किरदार निभाने वाले लोगों को लिया गया है। यह सदस्य रामलीला के पात्रों में इतना लीन हो चुके हैं कि उन्हें कुछ और करने का मन ही नहीं करता। हर माह में 20 दिन घरों से दूर रहकर रामलीला का मंचन कर रहे हैं। कौशिक का कहना है कि रामलीला के मंचन में चंद्रभूषण 8 वर्ष से भगवान श्रीराम का किरदार निभा रहे हैं। तन्मय भी 8 वर्ष से हनुमान, सचिन शर्मा 8 वर्षों से लक्ष्मण, रवि कौशिक 7 वर्ष से माता सीता, कपिल 8 वर्ष से भरत, अनुज 7 वर्ष से शत्रुघ्न, रावण व दशरथ के किरदार में 25 वर्ष से सीताराम शर्मा, विभीषण के किरदार में 25 वर्ष से रामकुमार, 8 वर्ष से रोहित शर्मा कैकेयी के पात्र में इतना ढल चुके हैं कि उन्हें पात्र के बारे में कुछ बताने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
मुंबई, सूरत व गुजरात में कर चुके हैं मंचन
पुलिन बिहारी शर्मा का कहना है कि वह सूरत, अयोध्या, मुंबई, पंजाब व गुजरात जैसी जगहों पर रामलीला का मंचन कर चुके हैं। एक माह में वह दो जगह जाकर रामलीला का मंचन करते हैं। इसके बाद 10 दिन के लिए सभी अपने घर रहते हैं। घर की व्यवस्था संभालने के बाद वे फिर किसी अन्य जगह जाकर रामलीला का मंचन कर रहे हैं। उनकी मंडली सनातन धर्म के प्रचार के लिए रामलीला मंचन के साथ गौरांग लीला (चरित्र), चेतन महाप्रभु लीला, रासलीला के कार्यक्रम कर रही है। यहां 5 अक्तूबर को रामलीला मंचन के समापन के बाद वह अयोध्या में गौरांग लीला का मंचन करेंगे।