बीसवां मील से कुंडली तक आठ किलोमीटर के बीच नेशनल हाईवे (एनएच)-44 पर सात फ्लाईओवर का निर्माण चल रहा है इसकी वजह से इस दूरी के बीच हमेशा जाम लगा रहता है। वाहन चालक गाड़ी रेंग-रेंगकर चलाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। जाम की वजह से वाहन चालकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। घंटों में जाम में फंसे रहने की वजह से उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। बीसवां मील, नाथूपुर, रसोई, निफ्टम चौक व कुंडली के पास फ्लाईओवर निर्माण हो रहा है।
दिल्ली से पानीपत तक एनएच-44 2100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च कर चौड़ा किया जा रहा है। इसका काम अप्रैल, 2019 तक पूरा होना था। लेकिन कई बार इसका समय बढ़ाया जा चुका है। दिल्ली से चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर तक जाने वाला यह इकलौता नेशनल हाईवे है। वर्ष 2019 में इसका काम तेजी से शुरू हुआ था। लेकिन कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के चलते बीसवां मील से आगे फ्लाईओवर का निर्माण अधर में लटक गया था। बाद में दिसंबर, 2021 में किसानों की घर वापसी के बाद एनएच-44 पर वाहनों का आवागमन शुरू कर दिया था। इसके साथ ही किसान आंदोलन के चलते बंद पड़े बीसवां मील व नाथूपुर फ्लाईओवर का निर्माण भी शुरू हो गया। ऐसे में बीसवां मील, नाथूपुर, निफ्टम चौक व कुंडली स्थित फ्लाईओवर के पास दो लेन से ही वाहनों का आवागमन हो रहा है। जिसके चलते यहां अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। रसोई के पास भी फ्लाईओवर निर्माण के चलते सड़क को बीच से खोद दिया गया है। दिन के साथ ही रात में भी लंबा जाम लग जाता है, जिसका खामियाजा वाहन चालक भुगत रहे हैं।
महज 20 मिनट का सफर पूरा करने में कई बार एक घंटे तक का समय लग जाता है। लोगों का आरोप है कि वाहनों के जाम में फंसने से उनसे निकले वाले धुएं के कारण प्रदूषण भी लगातार बढ़ रहा है। साथ ही गर्मी में हालत ज्यादा खराब हो जाती है। लोगों ने जल्द हाईवे का निर्माण कराने की मांग की है।
सुबह और शाम बढ़ जाती है मुसीबत
एनएच-44 पर सुबह और शाम को जाम की स्थिति ज्यादा विकट हो जाती है। क्षेत्रवासी सुनील, बिजेंद्र, संजय शर्मा, मुकेश ने बताया कि हाईवे पर काफी अधिक वाहन है। ऐसे में कई स्थानों पर सड़क जहां छह लेन तक बन चुकी है। ऐसे में सरपट दौड़ते हुए वाहन जब बीसवां मील के पास पहुंचते हैं तो यहां दो लेन के चलते उनकी कतार लग जाती है। आगे निकलने की होड़ में कई बार वाहन चालक फंस जाते हैं और जाम लग जाता है। खासकर सुबह व देर शाम तो हालात बदतर हो जाते हैं। जहां फ्लाईओवर बन रहा है वहां सबसे अधिक दिक्कत है। रसोई के पास फ्लाईओवर निर्माण के लिए गड्ढा खोदा गया है। वह भी वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा रहा है। यहां जाम की स्थिति के साथ ही हादसा होने का डर रहता है।
रोजाना एक लाख वाहन गुजरते हैं
एनएच-44 पर वाहनों की कतार लगी रहती है। हाईवे से रोजाना करीब एक लाख वाहन गुजरते हैं। वाहन चालकों का आरोप है कि बीसवां मील के पास बन रहे फ्लाईओवर के निकट ज्यादा दिक्कत होती है। दिल्ली की तरफ जाते हुए इस फ्लाईओवर से आगे काफी संख्या में भारी वाहन केजीपी व केएमपी का रुख कर लेते हैं। ऐसे में नाथूपुर फ्लाईओवर के पास भारी वाहनों का दबाव कुछ कम हो जाता है। लेकिन बीसवां मील के पास स्थिति विकट ही रहती है।
एनएच-44 पर वाहनों का आवागमन बेहतर करने के लिए फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं। पहले किसान आंदोलन के चलते इसमें देरी हो गई थी। अब यहां काफी तेजी से काम किया जा रहा है। बीसवां मील चौक के पास वाहन चालकों को परेशानी से बचाने के लिए पहल शुरू कर दी गई है। चौक के पास केजीपी तक 14 मीटर चौड़ा संपर्क मार्ग बनाया जा रहा है। इसका निर्माण जारी है। प्रयास रहेगा कि नवंबर माह तक हाईवे का निर्माण पूरा कर दिया जाए। जिससे वाहन चालक सरपट आवागमन कर सकेंगे। इससे वाहन चालकों को बहुत फायदा होगा।
आनंद दहिया, डीजीएम, एनएचएआई
एनएच-44 पर बीसवां मील के पास जाम में फंसे वाहन। संवाद- फोटो : Sonipat