सोनीपत। भड़रिया नवमी को शुभ कार्यों के लिए अक्षय तृतीया की तरह श्रेष्ठ माना गया है। देवशयनी एकादशी से पहले मनाई जाने वाली यह स्वयंसिद्ध तिथि है, इसके तहत बिन मुहूर्त के मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत की जा सकती है। इसके लिए किसी ज्योतिषाचार्य से सलाह लेने की आवश्यकता नहीं होती। इस बार भड़रिया नवमी पर सात शुभ योग बन रहे हैं।
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 15 जुलाई सोमवार को भड़रिया नवमी मनाई जाएगी। इसी दिन आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि भी है। इस अबूझ मुहूर्त पर बिना पंचांग देखे विवाह से लेकर कोई मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। नवमी के दिन सात शुभ योग बनने से इस दिन का महत्व अधिक बढ़ रहा है। भड़लिया नवमी के दिन रवि (शुभ) योग का निर्माण हो रहा है। इसके बाद सर्वसिद्धी व साध्य योग का संयोग बन रहा है। यह योग बेहद शुभ माने जाते हैं, इसलिए भड़रिया नवमी के दिन प्रत्येक शुभ कार्य का श्रीगणेश किया जा सकता है। साथ ही इस तिथि पर शुभ कार्य करने से अक्षय तृतीया के समतुल्य फल की प्राप्ति होगी।
इस दिन कुल सात शुभ योग बन रहे हैं। इनमें रवि (शुभ) योग, सर्वसिद्धी योग, साध्य योग, शिववास योग के अलावा बालव योग, कौलव व तैतिल योग शामिल हैं। भड़रिया नवमी को आमतौर पर क्षेत्र के अनुसार भादरिया नवमी, भदरिया नवमी, कंदर्प नवमी, भड़रिया नवमी, भड़ल्या नवमी, भढ़ली नवमी व बदरिया नवमी के नाम से भी जाना जाता है।
यह रहेगा शुभ मुहूर्त
पंडित अमित शौनक के अनुसार भड़रिया नवमी पर रवि (शुभ) योग का निर्माण हो रहा है। शुक्ल पक्ष की नवमी रविवार 14 जुलाई को रात 10:07 बजे प्रारंभ होकर सोमवार सुबह 4:14 तक रहेगी। इस दौरान साधक भगवान विष्णु व भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर शुभ कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं।
क्यों माना जाता है शुभ मुहूर्त
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार जिन लोगों के विवाह का कोई शुभ मुहूर्त नहीं है, वह इस दिन विवाह कर सकते हैं। इस दिन विवाह करने वालों को विष्णु जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भड़रिया नवमी के बाद चातुर्मास शुरू हो जाएगा। साथ ही भगवान विष्णु जी शिववास योग में शंकर जी को चार माह के लिए धरती के संचालन का कार्यभार सौंपकर शयन मुद्रा में चले जाएंगे। इसके बाद 12 नवंबर तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकेगा।
नवमी पर यह करें उपाय
- भगवान विष्णु व शंकर जी की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।
- भगवान विष्णु का सहस्त्र पाठ व पूजा-अर्चना कर उन्हें पीली मिठाई अर्पित करें।
- भगवान शंकर का रूद्राभिषेक कर उन्हें बेलपत्र व मिठाई अर्पित करें।
- साधक घर पर पंचामृत से भी भगवान शंकर का अभिषेक कर सकते हैं।
- सुख-समृद्धि के लिए कन्या पूजन कर मां सिद्धिदात्री को हलवा, छोले-पूरी व खीर का भोग अर्पित करें।
- मानसिक शांति के लिए एक स्थान पर रहकर ध्यान लगाएं, भगवान की आराधना करें।
- सुबह-शाम पीपल के वृक्ष की पूजा-अर्चना कर जल अर्पित करें।