सोनीपत। महेंद्रगढ़ के कनीना में वीरवार की सुबह हुए सड़क हादसे ने छह बच्चों की जान चली गई जबकि 15 से अधिक घायल हो गए। इस हादसे ने यातायात व्यवस्था समेत निजी स्कूल प्रबंधकों की पोल खोल दी है। सोनीपत की अगर बात करें तो यहां भी बिना नियम-कानून के चल रही स्कूली बसों में बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जिम्मेदार गहरी नींद में सोए हैं। वीरवार को ईद-उल-फितर का अवकाश होने के बावजूद कई निजी स्कूल संचालकों ने स्कूल खोले रखे। प्रशासनिक व शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पर मौन हैं।
वीरवार को ईद-उल-फितर पर जिले भर के राजकीय व अराजकीय विद्यालय में अवकाश घोषित था। इसके बाद भी अधिकतर निजी स्कूल खुले रहे, जबकि नियमों के अनुसार स्कूलों में घोषित अवकाश के बावजूद यदि कोई निजी स्कूल संचालक स्कूल खोलता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान हैं, लेकिन जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग की ढिलाई का फायदा उठाते हुए निजी स्कूल संचालक लगातार नियमों की अवहेलना करते हुए अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। वीरवार को अवकाश के बावजूद स्कूलों की बसें सड़कों पर दौड़ती नजर आई। हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी नवीन गुलिया ने ऐसे स्कूलों की सूची तैयार करने की बात कही है जो अवकाश के बाद भी खुले हुए थे। ऐसे स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने की खानापूर्ति, मिली कई अनियमितताएं
हादसे के बाद जागी पुलिस ने जब चेकिंग अभियान चलाया तो निजी स्कूली वाहनों में कई खामियां मिलीं। कहीं बस चालक वर्दी में नहीं मिले तो कहीं स्कूलों में लगाए गए निजी वाहनों में बच्चे निर्धारित संख्या में अधिक भरे हुए थे, कई वाहनों पर स्कूल का नाम व मोबाइल नंबर तक नहीं था। गीता भवन चौक पर तैनात यातायात पुलिस ने नियमों पर खरे नहीं उतरने वाले वाहन चालकों को कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में लगातार जांच अभियान चलाया जाएगा। नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के यह हैं नियम
-स्कूल बस पीले रंग की हो, उस पर नीले गहरे रंग की पट्टी अनिवार्य है। बस के आगे सफेद चमकीली पट्टी, पीछे लाल रंग और दोनों ओर पीले रंग की रिफ्लेक्टर पट्टी होनी चाहिए।
-बस के सभी आवश्यक परमिट, पंजीकरण प्रमाण पत्र, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र दस्तावेज पूरे होने चाहिए।
-बस का चालक अनुभवी कुशल होना चाहिए, उसके साथ महिला अटेंडेंट एक परिचालक भी होना चाहिए।
-बस के आगे व पीछे स्कूल बस व साथ में स्कूल संचालक, पुलिस कंट्रोल नंबर और चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर लिखे होने चाहिए।
-स्कूल बसों में जीपीएस के साथ ही सीसीटीवी हो और उनकी रिकॉर्डिंग क्षमता 15 दिन होनी चाहिए।
-चालक को पांच साल का अनुभव हो और उनका इस समयावधि में तीन बार से अधिक चालान न कटा हो।
-बच्चों की सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया स्टॉफ, कंडक्टर महिला अटेंडेंट पूरी तरह से पारंगत होने चाहिए।
-बस की गति अधिकतम 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक हो और उनमें स्पीड गवर्नर लगे होने चाहिए।
-ड्यूटी के समय चालक व परिचालक वर्दी में हों और कमी पर नेम प्लेट होना अनिवार्य है।
बस किराये पर ली गई है तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए।
-बसों में प्राथमिक उपचार पेटी, अग्निशमन यंत्र नियमों के अनुसार होने चाहिए।
-स्कूल बस व वाहन में स्कूल का नाम, रूट और समय का बोर्ड लगा होना चाहिए।
-सभी वाहन चालकों का तीन वर्ष में एक बार जिला सिविल सर्जन से मेडिकल फिटनेस होना चाहिए।