सोनीपत विश्राम गृह में पत्रकारों से बातचीत करते दहिया खाप के प्रधान सुरेंद्र दहिया। संवाद
सोनीपत। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) की ट्रैक्टर यात्रा व फिर से किसान आंदोलन शुरू करने की आहट के बीच दहिया खाप के प्रधान सुरेंद्र दहिया ने किसान संगठनों से आंदोलन का रास्ता छोड़कर सरकार से सीधे बातचीत करने को कहा है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री या कृषि मंत्री से मिलने का समय लें। कहा कि वर्ष 2020-21 के आंदोलन में प्रदेश को भारी नुकसान हुआ था। आंदोलन में असामाजिक तत्वों के शामिल होने से देश की छवि को आघात लगा था।
लोक निर्माण विश्राम गृह में वीरवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान दहिया खाप प्रधान ने कहा कि 13 फरवरी को दिल्ली कूच की घोषणा से हरियाणा के लोग एक बार फिर सहम गए हैं। खासकर सोनीपत के लोगों को आंदोलन के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ा था। उद्योगों से लेकर दुकानदारों तक का रोजगार चला गया था। किसानों की भी जान गई थी। अब किसानों को कोई भी कदम उठाने से पहले उससे होने वाले नुकसान के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन में ट्रांसपोर्ट ठप हो गया था। अकेले सोनीपत ट्रक यूनियन को 50 करोड़ का नुकसान हुआ था। बहुत से ट्रक मालिकों को अपने ट्रक बेचने पड़े थे। किसान संगठन सोनीपत को आंदोलन का केंद्र नहीं बनाए।
आंदोलन के बाद जिले में बढ़ा नशा
सुरेंद्र दहिया ने कहा कि पिछले आंदोलन के बाद प्रदेश में चिट्टा समेत अन्य मादक पदार्थों का चलन बढ़ गया। युवा वर्ग नशे की चपेट में आ गया। उन्होंने कहा कि खापों ने हर गांव से चंदा एकत्रित कर किसानों की मदद की थी। उस रुपये का सदुपयोग नहीं हुआ। सड़क जाम करना या संपत्ति का नुकसान करना कोई उपाय नहीं है।
आंतिल खाप कल बैठक कर लेगी फैसला
आंतिल चौबीसा ने किसान आंदोलन को लेकर 10 फरवरी को बैठक बुलाई है। इसमें बातचीत कर तय किया जाएगा कि आंतिल खाप किसान आंदोलन में शामिल होगी या उससे दूर रहेगी। आंतिल चौबीसा के प्रधान हवा सिंह आंतिल ने बताया कि वह अपने स्तर पर फैसला नहीं लेंगे। चौबीसा की बैठक बुलाकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। वहीं मलिक खाप पहले ही आंदोलन से दूर रहने की घोषणा कर चुकी है।