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छठ महापर्व की तैयारी शुरू, आज नहाय-खाय, 30 की शाम को पूजा

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सोनीपत। भगवान भास्कर की उपासना के पर्व छठ पूजा की तैयारी शुरू हो गई है। छठ पूजा का महापर्व 28 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। छठ पूजा में भगवान सूर्य और छठी माता की उपासना की जाती है। इसमें विधि-विधान और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसके लिए कई चरणों में तैयारी की जाती है। नदी और तालाबों के किनारे घाटों की साफ-सफाई का काम शुरू हो गया है। महिलाएं और पुरुष 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास रखते हैं। कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि को पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर उपवास का समापन होता है।
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सोनीपत शहर से यमुना की दूरी अधिक होने के कारण काफी संख्या में लोग एक निश्चित स्थान पर कुंड का स्वरूप देकर उसमें जल भरकर छठ पूजा करते हैं। इसके साथ ही पश्चिमी यमुना लिंक नहर पर भी काफी संख्या में लोग पूजा अर्चना करते हैं। इस बार छठ पूजा का शुभारंभ 28 अक्तूबर को नहाय-खाय के साथ होगा। पर्व पर लोग पवित्रतापूर्वक स्नान क्रिया संपन्न कर सात्विक भोजन करते हैं। यह शारीरिक शुद्धता के लिए होता है। 29 अक्तूबर को पर्व का सबसे महत्वपूर्ण चरण खरना होगा। खरना के दिन श्रद्धालु अपने कुलदेवता का पूजन करते हैं। दिन भर व्रत रखकर संध्याकाल में पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण करते हैं। इसके बाद प्रसाद का वितरण करते हैं। 30 अक्तूबर को पूरा दिन उपवास के साथ व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। महापर्व के अंतिम चरण में 31 अक्तूबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद प्रसाद ग्रहण किया जाएगा।
यहां होती है छठ की पूजा
जिले में छठ की पूजा यमुना के गढ़ मिरकपुर घाट, बेगा घाट, मिमारपुर घाट, एटलस मंदिर, दुर्गा कॉलोनी, बीसवां मील, ककरोई गांव के पास नहर के घाट पर, बड़वासनी नहर पुल के पास, कबीरपुर, बाबा कॉलोनी श्रीनगर व कालूपुर चुंगी में की जाती है। इसके अलावा विभिन्न कॉलोनियों में कुंड बनाकर महिलाएं इस पर्व की पूजा करती हैं।
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बाजारों में दिख रही छठ पूजा की सामग्री
छठ पर्व को लेकर बाजारों में रौनक छाने लगी है। पूजा सामग्री बाजार में दिखाई दे रही है। नारियल, केला, गन्ना, बांस के बर्तन, बांस की डलिया, पौध सहित अदरक व हल्दी बाजार में बिकने लगी है।
छठ पूजा की शुरुआत
जानें...किस दिन क्या होगा
28 अक्तूबर को है नहाय खाय
छठ पूजा की शुरुआत 28 अक्तूबर से होगी। पहले दिन नहाय खाय होगा। नहाय खाय के दिन महिलाएं नहाने के बाद घर की साफ-सफाई करती हैं। नहाय खाय के दिन हर घर में चने की दाल, लौकी की सब्जी और भात प्रसाद के रूप में बनता है। इन भोजन में सेंधा नमक का ही उपयोग किया जाता है।
29 अक्तूबर को होगा खरना
छठ पर्व के दूसरे दिन को खरना कहा जाता है। खरना 29 अक्तूबर को है। इस दिन व्रती महिलाएं गुड़ की खीर का प्रसाद बनाती हैं। उसे रात में ग्रहण किया जाता है। जिसके बाद इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। इसके बाद से 36 घंटे का व्रत शुरू हो जाता है।
30 अक्तूबर छठ पूजा का पहला अर्घ्य
छठ पूजा के तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं। व्रती महिला और पुरुष नदी, तालाब या फिर घर में ही पानी में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं।
सूर्यास्त का समय - शाम 5 बजकर 38 मिनट
31 अक्तूबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य
चौथे दिन व्रती पानी में खड़े होकर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद छठ पूजा संपन्न होती है। फिर व्रत का पारण किया जाता है।
सूर्योदय समय- सुबह 6 बजकर 33 मिनट
भाजपा नेता ने छठ पूजा की तैयारियों का लिया जायजा, घाटों का निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था देखी
लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा के मद्देनजर भाजपा नेता राजीव जैन ने वीरवार को विशेष रूप से कबीरपुर, बाबा कॉलोनी, श्रीनगर व कालूपुर चुंगी में बनाए गए घाटों का निरीक्षण किया। उन्होंने छठ घाटों की सफाई का जायजा लिया और अधिकारियों को सफल आयोजन के लिए कहा।
जैन ने कहा कि छठ पर्व पूर्वांचल की आस्था का प्रतीक है। छठ में सूर्यदेव की उपासना की जाती है। उन्होंने कहा कि छठी मैया सूर्यदेव की बहन हैं। सूर्यदेव को अर्घ्य देने पर छठी मैया खुश होकर सभी को सुख-शांति प्रदान करती हैं। छठी मैया निसंतानों को संतान प्रदान करती हैं। संतान को दीर्घायु प्रदान करती हैं। छठ व्रतियों की सुविधाओं के लिए पूर्वांचलियों की मांग पर शहर में कबीपुर व बाबा कॉलोनी में दो घाट व पार्क बनवा रखे है। दोनों घाटों पर प्रत्येक वर्ष हजारों श्रद्धालु छठ पूजा के लिए एकत्रित होते हैं। उन्होंने श्रीनगर कॉलोनी व कालूपुर चुंगी पर बने अस्थाई घाट का जायजा लेते हुए अधिकारियों को कहा कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाए।
इस दौरान भाजपा पूर्वांचल प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक संजय ठेकेदार, जिला संयोजक पं. शंकर स्वरूप शास्त्री, देवेंद्र सैनी, जिला सह संयोजक इंद्र मिश्रा, ईश्वर सैनी, अजय चौहान, संतोष ठाकुर, रमेश, अरविंद पांडे, नरेश, अशोक, मोहित शर्मा, देबू आदि मौजूद रहे।
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