- अनुदान पर कृषि यंत्र लेने को करानी होती है भूमि की तस्दीक
-किसान लघु सचिवालय परिसर में पटवारियों के धरने पर कागजात लेकर हस्ताक्षर की अपील कर रहे, नहीं हो रही सुनवाई
-कृषि विभाग ने रोटावेटर सहित 32 तरह के कृषि यंत्रों को अनुदान पर देने के लिए 15 जनवरी तय की है आवेदन की अंतिम तिथि
-पटवारखानों पर ताले लटके होने के कारण लोग मायूस होकर वापस लौट रहे
सोनीपत। पटवारियों व कानूनगो की हड़ताल का असर दूसरे विभागों पर भी पड़ रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने अनुदान पर कृषि यंत्रों के लिए आवेदन मांगे हैं। इसके लिए किसानों को पटवारी की रिपोर्ट जरूरी है। हड़ताल के चलते पटवारी आवेदक की जमीन की तस्दीक नहीं कर रहे हैं जिससे यह यह काम अटका पड़ा है। 3 जनवरी से पटवारी व कानूनगो पे ग्रेड बढ़वाने व अन्य मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं।
पटवारखानों पर ताले लटके होने से किसान व अन्य लोग अपने जरूरी काम कराने के लिए पटवारियों के पास धरना स्थल पर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पटवारियों ने उन्हें हस्ताक्षर करने से मना कर दिया हैं। ऐसे में कृषि यंत्रों को अनुदान पर लेने के लिए किसान कृषि विभाग की वेबसाइट पर आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की तरफ से वर्ष 2023-24 के दौरान कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (एसएमएएम) व राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के तहत 40 से 50 फीसदी अनुदान राशि पर 32 तरह के कृषि यंत्र दिए जाने हैं। लघु एवं सीमांत श्रेणी के किसान वर्ग को अनुदान पर कृषि यंत्रों का लाभ लेने के लिए पटवारी की रिपोर्ट अनिवार्य है। रिपोर्ट न मिलने के कारण किसानों के चेहरे पर मायूसी छा रही है। दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन हरियाणा के आह्वान पर पांच दिन से 79 पटवारी व 20 कानूनगो हड़ताल पर हैं। लघु सचिवालय परिसर में कानूनगो व पटवारियों की ओर से लगातार धरना दिया जा रहा है। पटवारखाने में जमीन से संबंधित काम कराने आए लोगों को बिना काम करवाए वापस घर लौटना पड़ रहा है। जमीन पैमाइश, भूमि रिकॉर्ड, फसलों का सत्यापन आदि के कार्य नहीं हो रहे। लोग उनके धरनास्थल पर अपने दस्तावेजों को बनवाने के लिए पटवारियों से अपनी फरियाद कर रहे है, लेकिन पटवारियों ने साफ मना कर दिया है कि जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों को नहीं मान लिया जाता, उनकी हड़ताल जारी रहेगी। उस दौरान वह न तो पटवारखानों में बैठेंगे और न ही वह कोई काम करेंगे।
सरकार न वार्ता के लिए नहीं बुलाया
जिला प्रधान सन्नी दहिया ने कहा कि वर्ष 2018 में पटवारियों की भर्ती हुई थी, उसके बाद कोई भर्ती नहीं हो सकी। इसके बाद सरकार की ओर से रिक्त पदों को नहीं भरा गया है। जिले में पटवारियों के 130 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 79 पदों पर पटवारी नियुक्त है। इसके चलते पटवारियों को दो-दो सर्कलों का काम करना पड़ रहा है। 10 जनवरी तक उनकी हड़ताल है, लेकिन सरकार ने उन्हें वार्ता के लिए नहीं बुलाया है। ऐसे में बुधवार को राज्य कार्यकारिणी की ओर से हड़ताल को बढ़ाया जा सकता है। धरनास्थल पर जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने पटवारियों व कानूनगो को समर्थन किया। इस दौरान एसोसिएशन के सचिव नितेश, युद्धवीर, संदीप धनखड़, रवि लाकड़ा, सुमित आंतिल व कानूनगो मौजूद रहे।
पांच दिन में 42 हजार फाइलें अटकीं
कानूनगो व पटवारियों की हड़ताल के चलते मंगलवार को भी तहसील परिसरों में रजिस्ट्री प्रक्रिया जारी रही। पांच दिन में करीब 42 हजार फाइलें लंबित है। इंतकाल, फर्द, वसीयतनामा, नक्शे सत्यापन के अलावा जाति, आय, रिहायशी व अन्य तरह के प्रमाणपत्र नहीं बन पाए। पटवारियों के फील्ड में न जाने के चलते फसल सत्यापन और जमीन की पैमाइश संबंधी कार्य भी प्रभावित हो रहे।
पांच दिन से पटवारियों के पास चक्कर काट रहे
गांव भटाना जाफराबाद निवासी रिंकू ने बताया कि कृषि विभाग ने रोटावेटर पर अनुदान दे रखा है। इसके लिए पटवारी की रिपोर्ट अनिवार्य है। पटवारी की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कराने के लिए पांच दिन से धरना स्थल पर जा रहा हूं, लेकिन पटवारी हड़ताल पर होने की बात कहकर कृषि भूमि की तस्दीक करने से मना कर रहे। जिसके चलते परेशानी बढ़ती जा रही है।
वर्जन
3 जनवरी से पटवारी व कानूनगो हड़ताल है। इसके चलते रजिस्ट्री प्रक्रिया को छोड़कर राजस्व विभाग के अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस मामले में मुख्यालय अवगत करा रखा है।-हरिओम अत्री, जिला राजस्व अधिकारी, सोनीपत।