सोनीपत। गांव भदाना निवासी धर्मबीर नैन क्लब थ्रो में तीसरी बार पैरालंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। वह 30 अगस्त को पेरिस के लिए रवाना होंगे। देश के लिए पदक लाने को जी जान से जुटे भीम अवार्डी धर्मबीर नैन रोजाना सुबह-शाम 4 से 5 घंटे तक पसीना बहा रहे हैं। देशवासियों को भी धर्मबीर नैन से देश के लिए पदक लाने की उम्मीद है।
28 अगस्त से शुरू होने जा रहे पेरिस पैरालंपिक खेलाें में भाग लेने जा रहे भारतीय दल में धर्मबीर नैन अनुभवी खिलाड़ियों में से एक हैं। उनका मुकाबला 4 सितंबर को होना है। इसके लिए भीम अवार्डी धर्मबीर नैन कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। धर्मबीर नैन का हालिया प्रदर्शन बेहतरीन रहा है, उन्होंने इसी साल जापान के कोबे में हुए विश्व पैरा-एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 33.31 मीटर के थ्रो के साथ नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया था। धर्मबीर नैन इससे पहले रियो व टोक्यो पैरालंपिक में भाग ले चुके हैं।
धर्मबीर नैन का सफर कठिनाइयों भरा रहा है। हादसे में आधा शरीर निष्क्रिय होने के बाद भी धर्मबीर ने हार नहीं मानी और मनोबल को बुलंद कर पैरालंपिक तक का सफर तय किया है। पेरिस पैरालंपिक में धर्मबीर नैन पदक के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। चलने-फिरने व खुद बैठने में असमर्थ धर्मबीर ऐसे युवाओं, खिलाड़ियों व दिव्यांगों के लिए एक मिसाल हैं जो किसी न किसी हादसे के बाद खुद को दूसरों पर बोझ मान रहे हैं।
एक हादसे ने बदलकर रख दी जिंदगी
धर्मबीर जून 2012 में दोस्तों के साथ नहर में नहाने के लिए गए थे। नहाने के लिए नहर में छलांग लगाई, लेकिन जलस्तर कम होने से गर्दन सीधा तलहटी से जा टकराई। इस हादसे में रीढ़ की हड्डी टूट गई व आधे से ज्यादा शरीर ने काम करना बंद कर दिया। भीम अवार्डी धर्मबीर नैन ने बताया कि शरीर से हष्ट-पुष्ट व्यक्ति जब अचानक से व्हीलचेयर पर आ जाता है तो उसका मनोबल काफी गिर जाता है। ऐसी स्थिति में परिवार, दोस्तों व गुरु अमित सरोहा के मार्गदर्शन व प्रेरणा से खेलना शुरू किया तो जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
अमित सरोहा को देख बदली जिंदगी
पांच फुट साढ़े नौ इंच कद का धर्मबीर नैन हादसे के बाद व्हीलचेयर पर आ गया था। वर्ष 2013 में उसने पैरा एथलीट अमित सरोहा के बारे में पढ़ा और उससे मुलाकात की। वहीं से धर्मबीर के जीवन की भी धारा बदलनी शुरू हो गई। अमित सरोहा को धर्मबीर ने भी अपना गुरु बनाया और प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। वर्ष 2015 में धर्मबीर ने नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और कमाल का खेल दिखाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किए। उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
यह हैं खास
-वर्ष 2016 की नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक।
-वर्ष 2016 के रियो ओलंपिक में पदक जीतने से चूके।
-वर्ष 2017 व 2019 की विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया।
-वर्ष 2018 में जकार्ता में होने वाले खेलों में क्लब थ्रो में रजत पदक।
- वर्ष 2021 के टोक्यो ओलंपिक में प्रतिभागिता की।
- वर्ष 2022 में दुबई में हुई फैजा अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप रजत पदक जीता।
- वर्ष 2024 में जापान के कोबे में विश्व विश्व पैरा-एथलेटिक्स चैंपियनशिप नए एशियाई रिकॉर्ड के साथ कांस्य पदक जीता।