पैतृक गांव खेवड़ा में लोग आधी रात को सुमित आंतिल के सोना जीतने की खुशी में मिठाइयां बांटकर व नाच कर जश्न मना रहे हैं। मुकाबले से पहले ही सुमित आंतिल के निवास स्थान पर खेलप्रेमियों की भीड़ लगने लगी थी। लोगों का कहना है कि बेटे ने सोनीपत व गांव को विश्व स्तर पर एक अलग पहचान दी है।
2015 में ट्यूशन से लौटते समय ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई थी बाइक, हादसे में गंवाना पड़ा पैर
सुमित आंतिल का जन्म 7 जून 1998 को हुआ था। तीन बहनों के इकलौते भाई ने परिवार की हर कमी को पूरा कर दिया। सुमित जब सात साल का था, तब एयरफोर्स में तैनात पिता रामकुमार की बीमारी से मौत हो गई। पिता का साया उठने के बाद मां निर्मला ने हर दुख सहन करते हुए चारों बच्चों का पालन-पोषण किया। निर्मला देवी ने बताया कि सुमित जब 12वीं कक्षा में था, कॉमर्स का ट्यूशन लेता था। 5 जनवरी 2015 की शाम को वह ट्यूशन लेकर बाइक से वापस आ रहा था, तभी सीमेंट के बोरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने सुमित को टक्कर मार दी और काफी दूर तक घसीटते ले गई। इस हादसे में सुमित को अपना एक पैर गंवाना पड़ा था।
सुमित कभी नहीं हुआ उदास
निर्मला देवी ने बताया कि हादसे के बावजूद सुमित कभी उदास नहीं हुआ। रिश्तेदारों व दोस्तों की प्रेरणा से सुमित ने खेलों की तरफ ध्यान दिया और साई सेंटर पहुंचा। जहां एशियन रजत पदक विजेता कोच विरेंद्र धनखड़ ने सुमित का मार्गदर्शन किया और उसे लेकर दिल्ली पहुंचे। यहां द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच नवल सिंह से जैवलिन थ्रो के गुर सीखे। सुमित ने वर्ष 2018 में एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया, लेकिन 5वीं रैंक ही प्राप्त कर सका। वर्ष 2019 में वल्र्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। बाद में टोक्यो पैरालंपिक में सोना जीतकर उन्हें जो खुशी दी उसे पेरिस में दोगुना कर दिया है।