फोटो 48- सोनीपत के गांव खेवड़ा में स्वागत जुलूस के दौरान कार पर सवार पैरालंपिक विजेता सुमित आंत
सोनीपत। पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक विजेता सुमित आंतिल का शुक्रवार को गांव खेवड़ा में स्वागत किया गया। ग्रामवासियों ने ढोल नगाड़े के साथ डीजे की धुन पर बज रहे गानों पर नाचते हुए पुष्प वर्षा के साथ सुमित का अभिनंदन किया। सुमित आंतिल ने जेवलिन थ्रो की एफ-64 स्पर्धा में देश की झोली में पैरालंपिक का लगातार दूसरा स्वर्ण पदक डाला है। सुमित आंतिल ने कहा कि पदक के लिए सुबह-शाम कड़ी मेहनत की थी, जिसका फल स्वर्ण पदक के रूप में मिला।
खेल रत्न व पद्मश्री अवार्डी सुमित आंतिल का खेल प्रेमियों ने धूमधाम से फूल व रुपयों की माला पहनाकर बहालगढ़ स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग से गांव खेवड़ा तक गाड़ियों के काफिले के साथ स्वागत जुलूस निकाला गया। सुमित आंतिल ने 2 सितंबर को मुकाबले में 70.59 मीटर के साथ दूसरी बार सोना जीता था। सुमित आंतिल ने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से मुलाकात की व उन्हें प्रदेश व जिले का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया। सुमित आंतिल ने कहा कि प्रतियोगिता काफी अच्छी रही, सभी खिलाड़ी अपना शत प्रतिशत दे रहे थे। पैरालंपिक में अपना खिताब बचाकर रखने वाला पहला खिलाड़ी बनने पर मुझे काफी खुशी है। उन्होंने कहा कि पूरी कोशिश रहेगी कि आने वाली प्रतियोगिताओं में नया विश्व रिकॉर्ड बनाए। पूरी टीम के साथ मिलकर ट्रेनिंग शेड्यूल तैयार किया जाएगा। जिससे कि मैं चोट से भी बच सकूं व अभ्यास को भी बेहतर तरीके से जारी रख सकूं। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि धैर्य रखें, अपनी मेहनत को जारी रखें व हौसला न हारें कामयाबी एक दिन जरूर आपके कदम चूमेंगी।
मुझे तोड़ दो मरोड़ दो चाहे कितना कड़ा अभ्यास कराओ...
प्रशिक्षक अरुण कुमार ने बताया कि मैंने आज तक सुमित जितना मेहनती व लगन वाला खिलाड़ी नहीं देखा। अभ्यास के समय सुमित अक्सर कहता था कि मुझे तोड़ दो मरोड़ दो चाहे कितना कड़ा अभ्यास कराओ, लेकिन मुझे देश के लिए सोना लाना है। अभ्यास के दौरान जब हम ट्रेनिंग करके वापस आते थे व सुमित अपना कृत्रिम पांव निकलता था तो करीब एक कप खून बहा होता था। सुमित ने स्वर्ण पदक के लिए खून-पसीना बहाया है। उन्होंने बताया कि पदक के बाद सारा दर्द खुशी में बदल गया।