सोनीपत। ई-टेंडरिंग के विरोध में पंच और सरपंचों ने शनिवार को विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली के समक्ष नारेबाजी की। ई-टेंडरिंग को लेकर उनकी मंत्री के साथ काफी नोंकझोंक हुई। सरपंचों का कहना है कि ई-टेंडरिंग से गांवों का ठीक ढंग से विकास नहीं हो पाएगा। ठेकेदार और अधिकारी अपनी मर्जी से गांव का विकास करा पाएंगे। सरपंचों का गांव के विकास में कोई भी हाथ नहीं रह जाएगा, जिसका जनप्रतिनिधि विरोध कर रहे हैं।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल में शनिवार को जिलास्तरीय पंचायती राज सम्मेलन के तहत जनप्रतिनिधि संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली ने ई-टेंडरिंग के जरिए गांवों का विकास कराने की बात कही। कार्यक्रम के बाद हुई चाय पर चर्चा के दौरान मंत्री जब नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच पहुंचे तो कई पंच और सरपंचों ने ई-टेंडरिंग का विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने मंत्री के विरुद्ध नारेबाजी शुरू कर दी। सरपंचों का आरोप था कि अगर उन्हें विकास कार्यों के लिए पैसा सीधे नहीं दिया जा सकता तो ठेकेदार और अधिकारी अपनी मनमर्जी से गांव में कार्य करवाएंगे। गांवों में होने वाले विकास कार्यों में लेट-लतीफी होगी। गांवों में पहले ही दो साल देरी से चुनाव हुए हैं जिससे गांवों में विकास के काम अटके हुए हैं। दुभेटा के सरपंच विकास आर्य ने कहा कि हम तो केवल अब गांव के चौकीदार बनकर ही रह जाएंगे। महज 2 लाख रुपये से ज्यादा के विकास कार्य हम नहीं करा पाएंगे। 2 लाख रुपये के विकास कार्य होंगे, उनके लिए भी ई-टेंडर लगवाने पड़ेंगे।
महमूदपुर के सरपंच सतपाल मान ने बताया कि वह वर्ष 2005 से 2010 के कार्यकाल में सरपंच थे। उस समय गांवों में विकास के कई कार्य करवाए। उस समय सरकार ने कोई बाधा नहीं डाली। अब सरकार की ओर से नीतियां बदली जा रही हैं। सरपंचों के द्वारा किए जाने वाले काम भी छीने जा रहे हैं। सरकार की ओर से कानून लाकर गांवों में दोबारा से पढ़ी-लिखी पंचायत बनवाई है, लेकिन उनके हाथों में विकास की डोर सौंपने में सरकार बाधा बन रही है। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस संबंध में कैबिनेट मंत्री को भी अवगत कराया, लेकिन सरपंचों की बात नहीं सुनी।
वहीं कैबिनेट मंत्री देवेंद्र बबली ने कहा कि सरकार शहरों की तर्ज पर गांवों का भी विकास करवाएगी। सरकार ई-टेंडरिंग के जरिये गांवों का विकास करवाने जा रही है। सरकार जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। पिछली सरकारों में जो सरपंच घोटाले करते थे, उनपर सरकार ने कार्रवाई करते हुए रिकवरी की है। अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर शिकंजा कसा है। सरपंच गांव का जनप्रतिनिधि है। वह कोई ठेकेदार या अकाउंटेंट नहीं है।