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चीनी मिल में जूस टैंक में लीकेज दूर नहीं करा पाए अधिकारी, 48 घंटे बाद पेराई शुरू नहीं

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चीनी मिल में जूस टैंक के अंदर मरम्मत कार्य में जुटे कर्मचारी। संवाद - फोटो : Sonipat
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द सोनीपत सहकारी चीनी मिल में अधिकारी जूस टैंक में लीकेज दूर नहीं करवा सके। जिसके चलते 48 घंटे बाद भी पेराई शुरू नहीं हो सकी। जिससे कारण किसानों की परेशानी बढ़ रही है। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा दो दिन से मिल में गन्ना लेकर पहुंचे किसानों को भुगतना पड़ रहा है। दो दिन के अंदर 8760 क्विंटल गन्ना मिल यार्ड में पहुंच चुका है। पेराई शुरू न होने के कारण किसान गन्ने से भरी ट्रालियां खड़ी करके खाली हाथ लौटने के लिए मजबूर हैं। दूसरी ओर मिल प्रबंधन किसानों को अब तक 70 हजार क्विंटल गन्ने की पर्ची जारी कर चुका है। मजदूरों की कमी होने के कारण किसान 15 हजार क्विंटल गन्ने की पर्चियां वापस कर चुके हैं।
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मिल परिसर में 17 नवंबर को सांसद रमेश कौशिक ने कैन मशीन में गन्ना डालकर पेराई सत्र की शुरुआत की थी। उसके बाद अधिकारियों ने मशीन को बंद करा दिया था। मिल के अंदर तैयारी पूरी न होने के कारण 48 घंटे से किसानों को परेशानी हो रही है। किसान लगातार गन्ना लेकर मिल यार्ड में पहुंच रहे हैं, लेकिन अधिकारी अब तक मशीनों की मरम्मत पूरी नहीं करवा पाए। अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसान गन्ने से भरी ट्रालियां मिल यार्ड में खड़ी करके वापस लौट रहे है। अधिकारी किसानों की बढ़ रही समस्या की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे। अधिकारी किसानों को मिल यार्ड में गन्ना कम होने की बात कर रहे हैं, लेकिन मिल के अंदर जूस टैंक में हुए लीकेज के बारे में किसानों को जानकारी नहीं दे रहे। मिल के जूस टैंक में आई लीकेज को ठीक करने के लिए कर्मचारी व अधिकारी दिन-रात लगे हुए हैं।
मिल की पेराई क्षमता रोजाना 22 हजार क्विंटल गन्ने की है। पेराई सत्र की विधिवत शुरुआत हुए दो दिन बीत चुके हैं। मिल में अभी तक गन्ने की पेराई शुरू नहीं हो पाई है। मिल यार्ड में अब तक 8760 क्विंटल गन्ना पहुंच चुका है। शुरुआत में मिल को धीमी गति से चलाया जाता है। उसके अनुसार मिल प्रबंधन ने किसानों से गन्ना मंगाया हुआ था। बाद में जैसे-जैसे पेराई बढ़ेगी, वैसे-वैसे मिल में गन्ने की मात्रा भी बढ़ा दी जाएगी। जूस टैंक के मरम्मत कार्य के चलते पेराई शुरू नहीं हो पाई है। जिससे किसान मिल यार्ड में अपनी गन्ने से भरी ट्रालियां छोड़कर घर लौट रहे हैं। अधिकारियों से पूछने पर जल्द मिल को चालू करने का आश्वासन मिल रहा है।
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दो दिन से गन्ने से भी ट्रालियां मिल यार्ड में खड़ी है। उद्घाटन के दो दिन बाद भी पेराई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। अधिकारियों से बार-बार पूछने पर किसानों को जल्द पेराई शुरू कराने का आश्वासन मिल रहा है। किसानों को मिल परिसर से वापस लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है।
सचिन, किसान
मिल प्रबंधन की ओर से तैयारी पूरी नहीं कर रखी है। अधिकारियों की तरफ से जल्द पेराई शुरू कराने के लिए वादा करके किसानों को बरगलाया जा रहा है। जिससे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुरेंद्र, किसान
मैं सुबह ट्रैक्टर-ट्राली में करीब 30 क्विंटल गन्ना लेकर पहुंचा गया था। शाम हो चुकी है, लेकिन मिल में अभी तक पेराई शुरू नहीं हो पाई है। मिल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
ब्रह्मदत्त, किसान
उनके पास मजदूरों की कमी है। मिल प्रबंधन की ओर से पर्ची भेजी जा रही है, लेकिन मिल में गन्ना पेराई नहीं की जा रही है। मिल प्रबंधन की ओर से जल्द गन्ने की पेराई कराई जानी चाहिए। जिससे किसान जल्द मजदूरों का प्रबंध करके गन्ने की छिलाई शुरू कर सकें।
कृष्ण, किसान
जूस टैंक में लीकेज दूर करने का काम जारी है। जल्द इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही पेराई क्षमता के हिसाब से गन्ना मिल में नहीं पहुंचा है। गन्ने की पेराई क्षमता रोजाना 2200 क्विंटल की है, लेकिन गन्ना अभी तक मिल यार्ड परिसर में 8760 क्विंटल पहुंचा है। मिल प्रबंधन की ओर से 70 हजार क्विंटल गन्ने की पर्चियां जारी की जा चुकी है। जबकि किसानों के पास मजदूरों की कमी होने के लिए 15 हजार क्विंटल गन्ने की पर्चियां वापस हो चुकी है। -अनुपमा मलिक, प्रबंध निदेशक सहकारी चीनी मिल
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