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राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर हुए नौ खेल : प्रशिक्षक व खिलाड़ी नाखुश

Tue, 22 Oct 2024 10:46 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत के गांव रायपुर स्थित अखाड़ा में अभ्यास करते पहलवान।
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सोनीपत। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से नौ खेलोें को बाहर कर दिया गया है। ऐसे में अब नौ खेलों के खिलाड़ी भाग नहीं ले पाएंगे। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के इस फैसले से सोनीपत के प्रशिक्षक व खिलाड़ी निराश और नाखुश हैं। उन्होंने इस फैसले को गलत बताते हुए कहा है कि इससे खेलों में नुकसान होगा। फैसले से राष्ट्रमंडल खेलों में पदक तालिका पर भी असर पड़ेगा। देश व प्रदेश के पहलवानों ने सबसे अधिक पदक कुश्ती में ही जीते हैं।
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सोनीपत के पहलवानों व प्रशिक्षकों ने राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती, हॉकी व बैडमिंटन को बाहर किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में केवल 10 स्पर्धाओं के मुकाबले कराए जाएंगे। इनमें एथलेटिक्स, तैराकी, नेटबॉल, ट्रैक साइकिलिंग, आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स, भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, जूडो, बाउल्स और बास्केटबॉल ही शामिल हैं। जबकि नौ खेलों को बाहर कर दिया गया है। प्रशिक्षकों व पहलवानों ने इस फैसले को कुश्ती व अन्य खेलों के प्रति साजिश बताया है। भारत के पहलवान कुश्ती में सबसे ज्यादा पदक लेकर आते हैं। ऐसे में साजिश के तहत भारत को पदक तालिका में नीचे रखने के लिए खेलों को बाहर किया गया है। सरकार को राष्ट्रमंडल खेल महासंघ पर दबाव डालना चाहिए कि वह खेलों को दोबारा शामिल करें। राष्ट्रमंडल खेलों में भारत अकेले कुश्ती में 49 स्वर्ण सहित 114 पदक पदक जीत चुका है। वर्ष 2022 में बर्मिंघम में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती स्पर्धा में भारत ने 12 पदक जीते थे।
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-राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर करने के फैसले से खेल के साथ देश के लिए भी नुकसान है। प्रदेश व जिले के बहुत से पहलवान प्रतियोगिता के लिए कड़ा अभ्यास कर रहे थे। फैसले से पहलवानों में निराशा है। कुश्ती के क्षेत्र में सोनीपत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। सरकार से मांग है कि कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल कराने के लिए प्रयास करें।-कुलदीप मलिक, ध्यानचंद व भीम अवाॅर्डी।
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-राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर करना भारत के लिए बड़ा झटका है। हम प्रतियोगिता के लिए सुबह शाम कड़ा अभ्यास कर रहे थे। वर्ष 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों की फ्रीस्टाइल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार भी पदक की उम्मीद थी। इस फैसले से देश में कुश्ती के लिए लोकप्रियता कम होगी। सरकार को भी आगे आकर पैरवी करनी चाहिए ताकि पहलवानों का मनोबल टूटने से बचाया जा सके।-नवीन मलिक, राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक विजेता।

-पहलवानों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के साथ राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए पदक जीते हैं। कुश्ती को बाहर करने से भारत को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। सरकार व खेल विभाग को राष्ट्रमंडल संघ से बात करनी चाहिए। भारत सरकार को कड़ा रुख अपनाते हुए इस फैसले का विरोध करना चाहिए। -सरिता मोर, भीम अवाॅर्डी।
-राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती के बाहर होने का फैसला काफी निराशाजनक है। प्रतियोगिता के लिए सुबह-शाम कड़ा अभ्यास कर रहे थे। राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती ने देश को सबसे ज्यादा पदक दिलाए हैं। मैं भी प्रतियोगिता के लिए खुद को तैयार कर रही थी। अब राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती के बाहर होने पर निराशा है।-काजल ढोचक, अंतरराष्ट्रीय पहलवान।
-राष्ट्रमंडल खेलों से हॉकी को बाहर करने का फैसला बेहद निराशाजनक है। इस फैसले से खिलाड़ी के अभ्यास व मनोबल पर बुरा असर पड़ेगा। भारत सरकार को चाहिए कि देश के खिलाड़ियों के साथ खड़े हो और इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रमंडल संघ से बातचीत करें। हॉकी खिलाड़ियाें को गिनी चुनी प्रतियोगिताएं मिलती हैं। उनसे भी देश को बाहर किया जा रहा है। पिछली बार कांस्य जीता था, इस बार स्वर्ण पदक की आस थी।-नेहा गोयल, ओलंपियन हॉकी खिलाड़ी
-राष्ट्रमंडल खेलों से हॉकी को बाहर करने से खेलों में देश को नुकसान होगा। हमारी पुरुष व महिला टीमों ने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक जीते हैं। पुरुष टीम ने अभी तक तीन रजत व दो कांस्य पदक जीते हैं। साल 2022 में टीम ने रजत पदक जीता था। वहीं महिला टीम ने स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक जीता है। इस बार दोनों वर्गों की टीमों से स्वर्ण पदक की उम्मीद थी। राष्ट्रमंडल संघ को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।-प्रीतम सिवाच, द्रोणाचार्य अवार्डी एवं भारतीय टीम की पूर्व कप्तान।

-राष्ट्रमंडल खेलों से नौ खेलों को बाहर करने का फैसला हैरान करने वाला है। बैडमिंटन में देश के खिलाड़ी अपने अलग पहचान बनाने लगे हैं। ऐसे में प्रतियोगिता के लिए खुद को तैयार कर रहे खिलाड़ियों का मनोबल कम होगा। अकादमी से करीब 10 खिलाड़ी कड़ा अभ्यास कर रहे थे। भारत सरकार को इस फैसले के लिए कड़ा विरोध करना चाहिए।-हरेंद्र मलिक, बैडमिंटन प्रशिक्षक
-वर्ष 2002 में भी राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर किया गया था, लेकिन बाद में विरोध किए जाने पर कुश्ती को फिर से शामिल किया गया। पहले की तरह सभी पहलवानों व प्रशिक्षकों को एकजुट होकर इसका विरोध करना होगा। यह पहलवानों के साथ ही देश के लिए दुखद खबर है। पहलवानों ने सदैव बेहतर प्रदर्शन कर देश का मान बढ़ाया है।-कुलदीप, कुश्ती प्रशिक्षक एवं अंतरराष्ट्रीय रेफरी।

-इस फैसले से खिलाड़ियों के मनोबल को आघात पहुंचा है। राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने के बाद खिलाड़ी का हौसला व आत्मविश्वास बढ़ता है। खिलाड़ियों का लक्ष्य होता है कि वह राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए पदक जीते। साथ ही पदक जीतने के बाद खिलाड़ी को सम्मान व आर्थिक लाभ भी मिलता है। देश को बैडमिंटन से काफी पदकों की आस रहती है। भारतीय खेल मंत्रालय को इस फैसले का विरोध करना चाहिए।- गगन बाल्याण, अंतरराष्ट्रीय शटलर।
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सोनीपत के गांव रायपुर स्थित अखाड़ा में अभ्यास करते पहलवान।

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