राई। नेशनल हाईवे-44 का निर्माण होने से वाहन चालकों को जहां राहत मिली थी, वहीं अब हाईवे के संपर्क मार्ग टूटने से मुसीबत बढ़ने लगी है। इसके साथ ही नालों का अधूरा निर्माण और जगह-जगह पर खुले होने से हादसे का भय बना रहता है। सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ही दयनीय हो रही हालत को लेकर वाहन चालकों में रोष बढ़ रहा है। करोड़ों रुपये से निर्मित हाईवे की स्थिति में सुधार की मांग उठने लगी है।
कुंडली से पानीपत तक चौड़ीकरण के बाद तैयार हुए 8 लेन के 24 किलोमीटर लंबे हाईवे, चार लेन के संपर्क मार्ग और 11 फ्लाईओवर को 20 जून 2023 को लोकार्पित किया गया। इस पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। दिल्ली को हरियाणा के अलावा चंड़ीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-44 के 70 किलोमीटर लंबे हिस्से का शिलान्यास 5 नवंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
प्रधानमंत्री ने शिलान्यास के दौरान कहा था कि इस हाईवे के महत्व को देखते हुए इसे कम समय में बनाने का प्रयास किया जाएगा। सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार यह हाईवे शुरुआत में छह लेन का तैयार करना था, लेकिन यहां पर भारी वाहनों की अधिकता को देखते हुए बाद में इसे आठ लेन में तब्दील कर दिया था। इसके अलावा दोनों तरफ दो-दो लेन के सर्विस रोड भी तैयार किए गए। पहले निर्माता कंपनी के भागने, फिर कोरोना संक्रमण व बाद में किसान आंदोलन ने हाईवे का निर्माण रोके रखा था। बाद में इसे वर्ष 2023 में पूरा किया जा सका।
बिगड़ गई संपर्क मार्ग की हालत
कुंडली से बहालगढ़ तक नेशनल हाईवे के संपर्क मार्ग पर कई जगह अब स्थिति बिगड़ गई है। पानी भरने के साथ ही संपर्क मार्ग के जगह-जगह टूटने से गड्ढे बन गए हैं। इससे हादसे का भय बना रहता है। कुंडली क्षेत्र में कुछ स्थानों के साथ ही राई के पास संपर्क मार्ग टूटा हुआ है। दिल्ली-पानीपत लेन पर बहालगढ़ फ्लाईओवर की शुरुआत के पास तो हाईवे की स्थिति बहुत दयनीय हो चुकी है। बड़े गड्ढे हादसे का सबब बन सकते हैं। राई व बहालगढ़ के बीच भी संपर्क मार्ग टूटकर बिखर गया है। गांव राई निवासी संजय, पुनित, राजेश व बहालगढ़ निवासी सुरेश, मनोज व राजेंद्र ने बताया कि हाईवे के संपर्क मार्ग की हालत में सुधार होना चाहिए। जिससे वाहन चालक परेशानी से बच सके।
टूटे व अधूरे नाले बढ़ा रहे मुसीबत
कुंडली व राई क्षेत्र में संपर्क मार्ग के साथ बने नालों का निर्माण कई स्थानों पर अभी तक पूरा नहीं है। जहां निर्माण हो चुका है वहां भी कई स्थानों पर वह टूट गए हैं। कई स्थानों पर स्लैब बनाए नहीं गए और कई स्लैब टूटे व अस्त-व्यस्त हालत में हैं। इससे हादसे का डर सताता रहता है
बारिश के दौरान जीटी रोड से जलनिकासी बेहतर हो, इसके लिए साथ लगते नालों की सफाई कराई जा रही है। इसके बाद जिन स्थानों पर नाले पर स्लैब नहीं हैं, वहां पर स्लैब मंगवाकर ढका जाएगा। सर्विस रोड पर बने गड्ढों को जल्द भरने का काम शुरू किया जाएगा। इसके बाद वाहन चालकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।-जगभूषण शर्मा, परियोजना निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण
फोटो 30. सोनीपत के राई के पास जीटी रोड के बीच नाले से हटाए गए स्लैब। संवाद