संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से रविवार को दिनभर बूंदाबांदी होती रही। सुबह शुरू हुआ बूंदाबांदी का दौर देर शाम तक जारी रहा। मौसम में आए बदलाव से अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। रविवार को जिले का अधिकतम तापमान 14.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 6.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों ने सोमवार को भी तेज हवाओं के साथ बारिश होने और कहीं-कहीं ओलावृष्टि के भी आसार जताए हैं।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ दो दिन पहले राजस्थान में सक्रिय हुआ था। जिसके चलते दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र सहित प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में रविवार व सोमवार को तेज गरज व हवाओं के साथ बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया था। रविवार सुबह से ही आसमान बादलों से ढका रहा। सुबह करीब 10:15 बजे बूंदाबांदी शुरू हुई थी। उसके बाद दिन भर रुक-रुक कर बूंदाबांदी का दौर जारी रहा। दिन में 10 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चली। दिनभर बूंदाबांदी जारी रहने से लोगों को एक बार फिर ठंड का अहसास होने लगा है।
पांच साल में हुई सबसे कम बारिश
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पांच साल में इस बार जनवरी में सबसे कम बारिश हुई है। कृषि विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार साल 2022 में जनवरी में औसतन 91.83 एमएम बारिश दर्ज की गई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा 5 एमएम तक भी नहीं पहुंच पाया है। साल 2021 के जनवरी में औसतन 35.66 एमएम, साल 2020 के जनवरी 15.75 एमएम, साल 2019 के जनवरी में औसतन 9.75 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।
मौसम के मिजाज से किसान खुश
गोहाना। मौसम के बदले मिजाज से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बूंदाबांदी होने और मौसम में बढ़ी ठंड से कृषि क्षेत्र को काफी फायदा पहुंचा है। किसानों का सिंचाई का खर्च कम हो गया है। सब्जियों की फसलों के लिए भी बूंदाबांदी लाभदायक है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि अब तक पाला गिर रहा था। जिससे फसलों की बढ़ोतरी प्रभावित थी। बूंदाबांदी के बाद गेहूं, सरसों सहित सब्जियों की ग्रोथ बेहतर होगी। हालांकि बारिश होती है तो सरसों, मटर व आलू की फसल को नुकसान हो सकता है। कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. राजेंद्र मेहरा ने बताया कि इस समय की हल्की बारिश गेहूं, जौ व जेई के लिए काफी अच्छी रहेगी। आसमान से गिरने वाली फुहारें फसलों के लिए किसी खाद या उर्वरक से कम नहीं हैं। इससे फसलों में ज्यादा फुटाव बनता है। पैदावार बढ़ जाती है। खासकर पछेती फसल को इससे ज्यादा फायदा मिलेगा।
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से रविवार को दिन भर बूंदाबांदी का दौर जारी रहा। सोमवार को भी आसमान में बादल छाने व तेज हवाओं के साथ बारिश होने के आसार बने हुए हैं। बूंदाबांदी से अधिकतम तापमान में गिरावट आई है। -डॉ. प्रेमदीप, मौसम वैज्ञानिक
फोटो 28- बूंदाबांदी के बीच छाता लेकर जाती महिला। संवाद