सोनीपत। कई सालों से बंद एटलस फैक्टरी की जमीन पर कॉलोनी काटने के मामले में गड़बड़ी करने पर नगर निगम के सहायक अभियंता पर गाज गिरी।
फैक्टरी की जमीन पर कॉलोनी काटने के लिए चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) तक नहीं ले रखा था। साथ ही नियमों को दरकिनार करके रिहायशी व व्यावसायिक प्लॉट भी काटे जा रहे थे। इस पर सहायक अभियंता नवरत्न वत्स ने मिलीभगत करके बिना किसी को सूचित किए 30 प्रॉपर्टी आईडी (पीआईडी) बना डाली। इस मामले में शहरी निकाय निदेशालय के आयुक्त एवं सचिव विकास कुमार ने तुरंत प्रभाव से निलंबित किया है।
एटलस फैक्टरी कई साल पहले बंद होने के बाद पुराने निर्माण को तोड़कर 10 एकड़ में जमीन पर कॉलोनी काटी जा रही थी। यह जमीन आज भी सरकारी रिकॉर्ड में फैक्टरी के लिए आवंटित है। इसे आगे तो बेचा जा सकता है, लेकिन फैक्टरी की जमीन पर रिहायशी व व्यावसायिक प्लॉट काटना असंभव है। नगर निगम के अधिकारियों को पता होते हुए भी फैक्टरी की जमीन पर काटे गए प्लॉटों पर प्राॅपर्टी आईडी बना दी। राजनीतिक दल के नेता की ओर से इस जमीन को खरीदा गया है। नगर निगम की ओर से की गई गड़बड़ी की जांच के मामले में डीसी ने निगमायुक्त से जवाब मांगा था।
नियमानुसार सीएलयू प्रमाणपत्र कंट्रोल एरिया में किसी भी भूमि को व्यावसायिक या किसी अन्य कार्यों के उद्देश्य बदलने के लिए लेना होता है। फैक्टरी की जमीन पर कॉलोनी तो काटी गई, लेकिन उसके लिए सीएलयू नहीं लिया गया था। ऐसे में इंडस्ट्री विभाग के महानिदेशक की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने के मामले में उपायुक्त ने रोक लगाई थी। उपायुक्त ने नगर निगम की ओर से बनाई गई प्रॉपर्टी आईडी (पीआईडी) के मामले में जवाब मांगा था। निगमायुक्त की ओर से की गई जांच में सहायक अभियंता नवरत्न वत्स की भूमिका गड़बड़ी मिली। निगमायुक्त ने बताया कि सहायक अभियंता प्रॉपर्टी आईटी के लिए चेकर बना रखा था। उसके बाद उसने मिलीभगत करते हुए फर्जी तरीके से 30 प्राॅपर्टी आईडी बना दी। इसके चलते मुख्यालय की तरफ से सहायक अभियंता पर गाज गिरी।