सोनीपत। एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर लाठ की लाडली ने लठ गाड़ दिया है। बेटी ने प्रतियोगिता के अंडर-17 आयु वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पहलवान काजल ढोचक का पदक जीतकर लौटने पर फूल व पैसों की माला पहनाकर और मिठाइयां बांटकर स्वागत किया गया।
काजल का सेक्टर 23 से बड़वासनी स्थित कुलदीप मलिक खेलकूद अकादमी तक सनरूफ कार में बैठाकर ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत जुलूस निकाला गया। पहलवान काजल ने जॉर्डन के अम्मान में 22 से 30 जून तक आयोजित की जा रही एशियन कुश्ती चैंपियनशिप के अंडर 17 आयु वर्ग के 73 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता है। काजल गांव बड़वासनी स्थित कुलदीप मलिक खेलकूद अकादमी में कुश्ती के दांव पेच सीख रही है। प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में काजल ने मंगोलिया की पहलवान त्सेरेन्नयम उरंजया को 10-0 से पटखनी देकर देश की झोली में स्वर्ण पदक डाला। बेटी के स्वर्ण पदक जीतने पर अंतरराष्ट्रीय रेफरी वीरेंद्र मलिक, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक राज सिंह छिक्कारा, प्रशिक्षक रणधीर मलिक, प्रशिक्षक अजय मलिक, एईओ जगबीर मलिक, शमशेर व सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष छिक्कारा ने बधाई दी है।
चाचा कृष्ण से प्रेरित होकर रखा कुश्ती के मेट पर कदम
अमर उजाला से खास बातचीत में काजल ढोचक ने बताया कि उन्होंने चाचा पहलवान कृष्ण से प्रेरित होकर कुश्ती के मेट पर कदम रखा था। वह छोटी आयु में चाचा के साथ कुश्ती का अभ्यास देखने जाती थी, यहीं से काजल के मन में कुश्ती के प्रति लालसा पैदा हुई। काजल ने नौ वर्ष की आयु में कुश्ती के गुर सीखना शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि एशियन चैंपियनशिप में पदक जीतना तो केवल शुरूआत है, मेरा लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। पहलवान काजल ढोचक ने अपनी जीत का श्रेय अपने चाचा पहलवान कृष्ण, पिता रविंद्र, अपनी मां व प्रशिक्षक कुलदीप मलिक को दिया है।
परिवार व गांव में जश्न का माहौल
लाडली काजल पहलवान के एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर लौटने पर परिवार, अकादमी व गांव लाठ में जश्न का माहौल है। टैक्सी चालक पिता रविंद्र ढोचक ने बताया कि बेटी काजल ने पदक जीतकर परिवार व गांव का नाम ऊंचा किया है। बेटी सुबह शाम कड़ा अभ्यास करती है। चाचा पहलवान कृष्ण ने बताया कि काजल ने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया है। काजल ने 13 वर्ष की आयु में भारत केसरी का खिताब अपने नाम किया था। वह अब महज 16 वर्ष की आयु में 16 बार भारत केसरी का खिताब जीत चुकी है।
सोनीपत के सेक्टर 23 में बेटी काजल के एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में पदक जीतकर लौटने पर स्वागत करत