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Sonipat News: 14 मार्च से लगेगा खरमास, रुकेंगे शुभ काम

Tue, 12 Mar 2024 10:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत। भगवान सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही 14 मार्च से मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। 14 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे और 13 अप्रैल तक विराजमान रहेंगे। इस अवधि को खरमास कहा जाता है, जिसमें सभी मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। इस दौरान धार्मिक कार्य जैसे पूजा-पाठ व हवन तो किए जा सकेंगे लेकिन शुभ एवं मांगलिक कार्य जैसे शादियां, ग्रह प्रवेश, सगाई, मुंडन काम नहीं किए जाएंगे।
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ज्योतिषाचार्य पं. मनमोहन मिश्रा ने बताया कि हिंदू मान्यताओं में खरमास एक ज्योतिषीय घटना है। धार्मिक तौर पर खरमास के दिनों को बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने बताया कि साल में दो बार खरमास लगता है। 1 दिसंबर से जनवरी तक (धनु खरमास) और दूसरा मार्च-अप्रैल माह में लगने वाले खरमास को मीन खरमास के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार मार्च में जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है तो खरमास लगता है। इस बार खरमास 14 मार्च से शुरू होकर 13 अप्रैल को संपन्न होंगे। उन्होंने बताया कि माता की पूजा, नवरात्रि, होलाष्टक व होली खरमास के दौरान आ रहे हैं। ऐसे में कोई भी धार्मिक कार्य यानी पूजा-पाठ और हवन आदि किया जा सकता है, लेकिन किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते हैं।
किए जा सकेंगे धार्मिक कार्य व पूजा-पाठ
पं. मनमोहन मिश्रा ने बताया कि हर साल खरमास में सूर्यदेव के रथ के घोड़े आराम करते हैं। जो विभिन्न गतिविधियों के लिए शुभ और अशुभ समय निर्धारित करने में महत्व रखते हैं। सूर्यदेव 14 मार्च को रात 12 बजकर 2 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही खरमास शुरू हो जाएगा। सूर्यदेव मीन राशि में 13 अप्रैल रात 9 बजकर 3 मिनट तक रहेंगे। इस पूरे एक महीने खरमास रहेगा। इसमें विवाह, मुंडन समारोह व गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों पर रोक रहेगी। जबकि देवताओं, माता पूजन, ब्राह्मणों, गायों की पूजा व सेवा कार्य किए जा सकते हैं।
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इसलिए है धार्मिक कार्यों की मनाही
धार्मिक मान्यता है कि खरमास के दौरान सूर्यदेव बृहस्पति की राशि में प्रवेश कर अपने गुरु की सेवा पर ध्यान केंद्रित करते हैं जिससे सांसारिक कार्यों पर उनका प्रभाव कम हो जाता है। कहा जाता है कि इस कम प्रभाव की वजह से ही खरमास के दौरान किए गए शुभ कार्य अधिक सफल नहीं होते हैं। यही कारण है कि इस दौरान शुभ या मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है।
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