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शिक्षा पर भारी पड़ी तबादला नीति : किसी स्कूल में बढ़ाए पद तो किसी में कर दिए खत्म

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सोनीपत। शिक्षा विभाग की तबादला नीति में बड़ी खामियां सामने आ रही हैं। किसी स्कूल में विद्यार्थी संख्या के हिसाब से शिक्षकों की संख्या अधिक हो गई है, तो कहीं विषय के शिक्षक ही नहीं रहे। जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा। सबसे अधिक विज्ञान विषय के अध्यापक प्रभावित हुए हैं। अध्यापकों की मानें तो रेशनलाइजेशन नीति के तहत सबसे अधिक विज्ञान विषय के पद खत्म किए गए हैं। इसमें जहां जीव विज्ञान के पदों को सरप्लस किया गया है, तो वहीं विज्ञान के पद कैप्ट किए गए हैं।
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शिक्षा विभाग में लंबे समय से तबादले नहीं हुए थे। शिक्षक भी तबादला प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे थे। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की मांग को पूरा करते हुए तबादला प्रक्रिया तो पूरी कर दी थी, लेकिन इससे पहले नई रेशनलाइजेशन नीति के तहत स्कूलों में शिक्षकों के पद कम व ज्यादा कर दिए। इस नीति का विरोध हुआ तो कहा गया कि स्कूलों में विद्यार्थी संख्या के हिसाब से ही पद दिए गए हैं। जिले की बात करें तो यहां 2200 शिक्षकों में से करीब 1200 शिक्षकों ने तबादला प्रक्रिया में भाग लिया था। इसमें से अधिकतर को पहली पसंद का स्कूल मिला है। जिन शिक्षकों के तबादले हुए हैं, उनमें 80 फीसदी का जिले में और 20 फीसदी का अन्य जिलों में तबादला हुआ है।जिससे शिक्षकों में खुशी व निराशा का माहौल बना हुआ है।
शिक्षकों का कहना है कि तबादला प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गई हैं। फाइन आर्ट विषय की बात करें तो जिले में इस विषय के 60 पद हैं। इन 60 पदों में से महज 19 पद ही खोले गए हैं। जबकि 72 फीसदी पद कैप्ट कर दिए गए हैं। जिससे शिक्षकों में भी रोष बना हुआ है। शिक्षकों का कहना है कि फाइन आर्ट के साथ ही राजकीय उच्च विद्यालयों में से विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी विषय के अधिक पद कैप्ट किए गए हैं। गढ़ी ब्राह्मणान स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थी संख्या 200 है। इसके बावजूद नई रेशनलाइजेशन नीति के तहत यहां गणित, डीपीई व शारीरिक विज्ञान के पद कैप्ट कर दिए। वहीं राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जुआं में छठी से 10वीं कक्षा तक 135 विद्यार्थी हैं। यहां गणित विषय का पद कैप्ट कर दिया। वहीं स्कूल में विज्ञान विषय पढ़ाने वाला भी कोई अध्यापक नहीं है। स्कूल में गणित अध्यापक सेक्टर-23 सोनीपत निवासी विजय का तबादला पानीपत कर दिया गया।
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ऑनलाइन ड्राइव में पोर्टल पर नहीं दिखाया पद
खरखौदा। खंड के जाटौला स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या 138 है। इनमें छठी से 10वीं कक्षा तक के करीब 100 विद्यार्थी हैं। नई रेशनलाइजेशन नीति के तहत यहां टीजीटी विज्ञान की पोस्ट कैप्ट कर दी, जबकि टीजीटी गणित की सरप्लस कर दी। यहां कार्यरत विज्ञान विषय की शिक्षिका का कुंडली में तबादला कर दिया गया। खास बात यह है कि ऑनलाइन ट्रांसफर ड्राइव में इस स्कूल में ऑनलाइन पोस्ट ही नहीं दिखाई गई। जिस कारण विज्ञान व गणित विषय के किसी अध्यापक का यहां तबादला नहीं हुआ। ऐसे में इस स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थी गणित व विज्ञान विषय को कैसे समझेंगे, यह दुविधा बनी हुई है।
विज्ञान विषय के 60 विद्यार्थी, स्कूल में भेजे सात अध्यापक
गन्नौर। खंड के गांव दातौली स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विज्ञान संकाय के 60 विद्यार्थी हैं। जबकि तबादला प्रक्रिया के तहत यहां गणित, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान व रसायन विज्ञान के सात अध्यापकों का तबादला किया गया है। जबकि कई स्कूल ऐसे हैं, जहां विद्यार्थी संख्या अधिक होने के बावजूद विज्ञान व गणित विषय का अध्यापक ही नहीं है। तबादला प्रक्रिया में हुई इस प्रकार की खामी से विद्यार्थियों को नुकसान झेलना पड़ेगा।
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कुछ अन्य स्कूलों की स्थिति
-राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, राठधना में छठी से 10वीं कक्षा तक कुल 170 विद्यार्थी हैं। यहां विज्ञान विषय का कोई भी अध्यापक नहीं है। पहले जो शिक्षक थे, उनका तबादला हो गया है।
-राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, गढ मिरकपुर में छठी से 10वीं कक्षा तक 323 विद्यार्थी हैं। इतने विद्यार्थियों पर महज एक ही टीजीटी विज्ञान का पद दिया गया है।
-गांव माहरा स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छठी से दसवीं कक्षा तक 120 विद्यार्थी संख्या है। इसके बावजूद यहां विज्ञान विषय का एक भी अध्यापक नहीं है।
-राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, करेवड़ी में विद्यार्थियों की संख्या 100 होने के बावजूद यहां कोई भी टीजीटी या पीजीटी विज्ञान नहीं है।
-खंड मंडलाना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छठी से 10वीं कक्षा तक 143 विद्यार्थी हैं, लेकिन इन्हें विज्ञान विषय का शिक्षक नहीं है।
-गन्नौर के गांव पांची-जाटान स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 202 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। इस स्कूल में विज्ञान व गणित विषय का एक भी अध्यापक नहीं है।
-गांव सिटावली स्थित राजकीय उच्च विज्ञान में 144 विद्यार्थी हैं। यहां हिंदी विषय का अध्यापक नहीं हैं।
-राई स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में 800 विद्यार्थी हैं। छठी से दसवीं कक्षा तक 14 वर्ग (सेक्शन) बनाए गए हैं। इतने बच्चों को पढ़ाने के लिए महज एक एसएस मास्टर दिया गया है।
-गांव शाहपुर तुर्क स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थी संख्या के अनुसार राजनीति विज्ञान का एक पद होना चाहिए, लेकिन यहां दो पद दे दिए गए।
बदलना पड़ा स्कूली खेलों का शेड्यूल
शिक्षा विभाग की तबादला प्रक्रिया के तहत स्कूलों से डीपीई व पीटीआई के भी तबादले हुए हैं। जिसका असर स्कूली खेलों पर पड़ा है। शिक्षा अधिकारी असमंजस में हैं कि स्कूली खेलों को संपन्न करवाने के लिए किसकी ड्यूटी लगाएं। स्थिति को देखते हुए खंड स्तरीय व जिला स्तरीय स्कूली खेल प्रतियोगिताओं के शेड्यूल में बदलाव किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कौशल्या रानी ने बताया कि एक से 3 सितंबर तक होने वाले खंड स्तरीय खेल अब 5 से 7 सितंबर तक आयोजित किए जाएंगे। वहीं 8 से 10 सितंबर तक होने वाले जिला स्तरीय खेलों का आयोजन अब 12 से 16 सितंबर तक करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 2 सितंबर को सुबह 11 बजे एसएम हिंदू वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, पीजीटी, डीपीई, पीटीआई की बैठक बुलाई गई है। बैठक में तबादला होकर आए नए पीटीआई, डीपीई व अन्य अधिकारियों को स्कूल खेल संपन्न करवाने बारे दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
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तबादला प्रक्रिया में काफी विसंगतियां हैं। जिस बारे में पहले भी अवगत कराया गया था। उस समय विभाग की तरफ से कहा गया था कि जो भी विसंगतियां आ रही हैं, उन्हें दूर कर दिया जाएगा। तबादले हो चुके हैं, लेकिन खामियों को दूर करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए। इस नीति से अनेक स्कूल ऐसे हैं, जिनमें विज्ञान, गणित विषय के अध्यापक ही नहीं रहे। ऐसे में विद्यार्थी कैसे इन विषय को समझ पाएंगे। विद्यार्थियों के हित को देखते हुए इन विसंगतियों को जल्द दूर किया जाना चाहिए।
रुचिका, प्रेस सचिव, हसला
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वर्जन
एक षडयंत्र के तहत राजकीय स्कूलों को बंद करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत पहले ग्राम पंचायतों से स्कूलों के नाम जमीन कराई। उसके बाद तबादला नीति रेशनलाइजेशन के नाम पर विज्ञान संकाय को तोड़ दिया। जिसके तहत गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान व जीव विज्ञान को अलग- अलग कर दिया। उच्च विद्यालयों में विज्ञान विषय के अध्यापक ही नहीं छोड़े। अव्यवहारिक नीति के आधार पर किए गए तबादलों को हसला संगठन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा। जब तक अव्यवहारिक रेशनलाइजेशन और नॉर्मलाइजेशन को दुरुस्त नहीं किया जाता। तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
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नरेंद्र सहरावत, जिला प्रधान, हसला
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