गोहाना। निस्वार्थ भाव से किए गए सत् कर्मों का फल किसी न किसी
रूप में हमें कब मिल जाए यह कोई नहीं जानता। ऐसा ही एक वाकया गोहाना के
गांव मोई हुड्डा में देखने के लिए मिला।
गांव काहनी निवासी मास्टर प्रेम शर्मा ने निस्वार्थ भाव से गांव मोई हुड्डा
में बच्चों को 40 साल तक पढ़ाते हुए शिक्षा की लौ जलाई। उन्होंने खुद का
बेटा न होने पर गांव के बच्चों को ही अपना बेटा मानकर शिक्षा दी। जब तक
शरीर ने साथ दिया तब तक पढ़ाना जारी रखा। अब ग्रामीणों ने मास्टर प्रेम
शर्मा को गुरु दक्षिणा के रूप में मान-सम्मान स्वरूप 6 लाख रुपये, डोगा
(छड़ी) व अन्य उपहार दिए। मास्टर प्रेम शर्मा का कहना है कि वे इस स्नेह से
काफी खुश हैं और अपने शिष्यों व ग्रामीणों के आभार के लिए धन्यवाद दौरा करेंगे।
मास्टर प्रेम शर्मा का जन्म काहनी गांव के ब्राह्मण परिवार में हुआ है। वह
गरीब परिवार से संबंध रखते हैं। पिता दूधिया का काम करते थे। उन्होंने
स्नातक की पढ़ाई की। मास्टर प्रेम शर्मा ने बताया कि गांव के बच्चों को
शिक्षा प्राप्त करने के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर गांव रुखी जाना पड़ता था,
जिस कारण काफी बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते थे।
उन्होंने गांव की चौपाल में ही पहली से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाने शुरू
किया। इस दौरान किसी भी बच्चे को फीस के लिए नहीं कहा। बाद में वह बच्चों
को ट्यूशन भी देने लगे, लेकिन यहां पर भी किसी से फीस नहीं ली। जो अभिभावक
अपनी मर्जी से कुछ दे जाते थे उसी को ले लेते थे। मास्टर प्रेम शर्मा ने
कहा कि 21 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। इसके बाद भी उन्होंने बच्चों
को निस्वार्थ भाव से पढ़ाना जारी रखा और उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उच्च पदों पर सेवाएं दे रहे शिष्य
मास्टर प्रेम शर्मा की तीन बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। दो बेटियां
आठवीं तक ही पढ़ पाईं और छोटी बेटी को उन्होंने बीए, एमए, बीएड एवं एमएड तक
पढ़ाया है। परिवार की स्थिति आज भी दयनीय है। इसके बावजूद मास्टर प्रेम
शर्मा ने बच्चों को शिक्षित करने के अपने कर्त्तव्य से कभी मुंह नहीं मोड़ा
और बच्चों को निशुल्क पढ़ाते रहे। उनसे शिक्षा ग्रहण करने वाले शिष्य आज
दिल्ली पुलिस, हरियाणा रोडवेज, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग व अन्य
विभागों में उच्च पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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कई स्कूलों और संस्थानों ने दिया था प्रलोभन
मास्टर प्रेम शर्मा ने बताया कि उन्होंने मोई हुड्डा गांव की चौपाल में
बच्चों को पढ़ाना शुरू किया तो धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। इस
पर कई निजी स्कूल के संचालकों ने उन्हें प्रलोभन दिया कि वे बच्चों को उनके
स्कूल में दाखिला दिला दें। उन्हें प्राचार्य का पद दिया जाएगा और पैसे भी
दिए जाएंगे, लेकिन उन्होंने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया और बच्चों को
निस्वार्थ भाव से नियमित पढ़ाना जारी रखा। आज उनके शिष्यों ने ग्रामीणों के
साथ मिलकर अपने गुरु को दक्षिणा के रूप में मान-सम्मान दिया है। इतना ही
नहीं ग्रामीणों ने सम्मान रैली का आयोजन कर मोई हुड्डा से गांव काहनी तक
लेकर गए। इस सम्मान के लिए मास्टर प्रेम शर्मा खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
मास्टर प्रेम शर्मा के साथ उनके शिष्य।