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एशियन गेम्स में अनुभवी प्रशिक्षक जाते तो ज्यादा पदक आते : ज्ञान सिंह

Fri, 13 Oct 2023 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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तदर्थ समिति के सदस्य एवं द्रोणाचार्य अवार्डी ज्ञान सिंह। संवाद
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सोनीपत। तदर्थ समिति के सदस्य एवं द्रोणाचार्य अवॉर्डी ज्ञान सिंह ने कहा कि एशियन गेम्स में टीम के साथ अनुभवी प्रशिक्षक जाते तो पदकों की संख्या बढ़ सकती थी और उनका रंग भी बदल सकता था।
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उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के साथ भेजने के लिए पता नहीं वह प्रशिक्षक कहां से लेकर आते हैं, जबकि हमारे जैसे तकनीकी लोगों से कुछ नहीं पूछा जाता। उन्होंने कुश्ती के संचालन में जब तक गैर खिलाड़ी लोग मौजूद रहेंगे, तब तक कुश्ती का भला नहीं हो सकता। वह वीरवार विश्व कुश्ती चैंपियनशिप की टीम के चयन को लेकर साई में आयोजित ट्रायल प्रक्रिया के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कुश्ती में नए पहलवान बेहतरीन खेल दिखा रहे हैं। दो दिन से चल रहे ट्रायल में कई नए खिलाड़ी उभर कर सामने आए हैं। उन्होंने अपने प्रदर्शन ने आश्चर्यचकित किया है। इस बीच उन्होंने कहा कि विवादों के बावजूद खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। एशियन गेम्स में पहलवानों ने छह पदक जीते हैं। ज्ञान सिंह ने कहा कि तदर्थ समिति के चेयरमैन भूपेंद्र बाजवा कुश्ती के बारे में ज्यादा नहीं जानते। वह कोच पता नहीं कहां से लेकर आते हैं। किसकी सिफारिश से कोच लगाए जाते हैं कुछ पता नहीं चल रहा, जबकि तकनीकी रूप से सशक्त लोगों से कुछ पूछा नहीं जा रहा। चेयरमैन किसी की नहीं सुनते। हम सदस्य नाम के हैं, लेकिन सुनवाई नहीं की जाती। बृजभूषण के बयान पर बोले कि वह राजनेता हैं। पिछली बार एशियन गेम्स में तीन पदक आए और अबकी बार छह आए हैं। इससे साफ है कि खेलों में भारत बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि फेडरेशन ढंग की होनी चाहिए। लूटकर खाने वाले सदस्य नहीं होने चाहिए। गैर खिलाड़ी प्रशासकों की वजह से समस्या आती है। कमेटी में केवल खिलाड़ी ही होने चाहिए।
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उनके सामने लिखे प्रशिक्षकों के नाम, बाद में बदल गए

ज्ञान सिंह ने बताया कि उन्होंने चेयरमैन बाजवा से पूछा था कि प्रशिक्षकों को पहलवानों के साथ भेजने के बारे में वह कहां से पूछकर आते हैं। उनकी भी सुनें। उन्होंने अपने सामने कुछ प्रशिक्षक के नाम लिखवाए थे, लेकिन बाद में उनके नाम बदलकर दूसरों के नाम लिख लिए गए। यदि प्रशिक्षक को लेकर सही चयन किया होता तो पदक के रंग भी बदल सकते थे और पहले से ज्यादा पदक भी आ सकते थे।
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