शहर के डेढ़ लाख लोगों को अभी सरकारी सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़ेगा। चूंकि 48 अवैध कॉलोनियों को हरी झंडी देने से पहले मुख्यालय ने नगर निगम प्रशासन को नए सिरे से कॉलोनियों की सीमा और एरिया की समीक्षा की हिदायत दी है। अब निगम के एक्सईएन के नेतृत्व में बिल्डिंग ब्रांच और भू-शाखा की मौके पर जांच कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस रिपोर्ट के चंडीगढ़ जाने के बाद कॉलोनियों को वैध करने की सूची फाइनल हो सकती है।
जुलाई 2015 में प्रदेश सरकार ने नगर परिषद को भंग करके निगम का दर्जा दिया। साथ में राई, सोनीपत और मुरथल ब्लॉक की 26 पंचायतों को निगम में शामिल कर लिया गया। इसके चलते निगम एरिया में अवैध कॉलोनियों की संख्या बढ़ गई। पिछले दिनों निगम प्रशासन ने एक निजी एजेंसी से सर्वे कराकर 48 कॉलोनियों की सूची चंडीगढ़ मुख्यालय वैध करने के लिए भेजी, लेकिन उसे वापस भेज दिया गया। हिदायत दी गई है कि निगम अधिकारी खुद मौके पर जाकर गहराई से निरीक्षण करें, ताकि कोई कॉलोनी और एरिया बच न जाए।
ये बोले शहरवासी, पहले वैध हुई कालोनियों की भी ली जाए सुध
पुरानी कॉलोनियों पर भी ध्यान देना जरूरी
बहुत अच्छा है, निगम कॉलोनियों का दायरा बढ़ा रहा है। हालांकि जो कॉलोनी पहले की बनी हुई हैं, उन पर भी ध्यान देना जरूरी है। क्योंकि वहा पर समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। यहां पर एक भी समस्या का समाधान नहीं होता है।
जगदीश कामरान-मॉडल टाउन निवासी
टैक्स आने लगा, मकान अब तक नाम नहीं
मैं पिछले 30 साल से छोटी मस्जिद में रह रहा हूं। मेरा मकान वक्फ बोर्ड की जमीन पर बना है। नगर निगम बनने के बाद हाउस टैक्स तो आना शुरू हो गया है, लेकिन मकान के पक्के कागजात आज तक मेरे नाम नहीं हुए हैं, इससे परेशानी बढ़ गई।
-समित रहेजा-निवासी छोटी मस्जिद
वैध कॉलोनी का तमगा ही नहीं लगाएं, सुविधाएं भी दें
वैध कॉलोनियां बढ़ने के साथ कुछ फायदा तो मिलेगा, लेकिन विकास तब होगा, जब धरातल पर लोगों को सुविधाएं दी जाएंगी। खाली वैध कॉलोनी का तमगा देने से कुछ नहीं होगा।
-दिनेश, निवासी छोटी मस्जिद
पानी की निकासी की तरफ देना होगा ध्यान
मैं पिछले 30 साल से सोनीपत में रहता हूं, लेकिन यहां पर सबसे ज्यादा दिक्कत पानी निकासी की है। नई कॉलोनियों में इस तरफ ध्यान जरूर दिया जाए, नहीं तो पानी के जमा होने से बीमारियों के आने का खतरा बना रहेगा।
-पवन जैन-शहरवासी
साफ-सफाई रखना है जरूरी
मैं यहां बहुत सालों से रहता हूं, लेकिन सफाई की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। कर्मचारी मुफ्त का वेतन उठा रहे हैं। सीवर जाम हो जाते हैं, लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। ऊपर से जगह-जगह सीवरों के ढक्कन खुले पड़े हैं।
-अशोक गर्ग, निवासी गुड़ मंडी
48 कॉलोनियों को वैध करने की प्लानिंग हैं। निजी एजेंसी द्वारा सर्वे भी कराया जा चुका है। जिसकी रिपोर्ट चंडीगढ़ भेजी गई थी। अब कॉलोनियों की जांच पड़ताल निगम के अधिकारियों की टीम करेगी। अगर कोई खामी रहती है तो उसे दूर किया जाएगा।
-आनंद किशोर, भवन निरीक्षक नगर निगम